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उत्तराखंड में मदरसों को अपना नया रजिस्ट्रेशन और मान्यता शिक्षा विभाग और नवगठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पास कराना अनिवार्य किया गया है

उत्तराखंड में मदरसों को अपना नया रजिस्ट्रेशन और मान्यता शिक्षा विभाग और नवगठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पास कराना अनिवार्य किया गया है

देहरादून: उत्तराखंड में करीब 2 महीने बाद भी मदरसों के रजिस्ट्रेशन का काम पूरा नहीं हो पाया है. इससे साफ है कि राज्य में अभी मदरसे नए नियमों को स्वीकार करने से कतरा रहे हैं. हालांकि ऐसे भी कई मदरसे हैं जो नए नियमों की आहर्ताएं पूरी नहीं करते, जिन पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है. उधर करीब 200 मदरसों ने ऑनलाइन माध्यम से रजिस्ट्रेशन के लिए आवेदन किया है. लेकिन राज्य में अब तक दर्ज 452 मदरसों में ये संख्या 50 प्रतिशत भी नहीं है.

50 प्रतिशत से कम मदरसों ने रजिस्ट्रेशन के लिए किया आवेदन: उत्तराखंड में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था खत्म होने के बाद अब नई व्यवस्था के तहत मदरसों को मान्यता देने की प्रक्रिया तेज हो गई है. सरकार जल्द ही करीब 22 मदरसों को रजिस्ट्रेशन पूरा होने के बाद मान्यता प्रमाणपत्र जारी करने जा रही है. खास बात यह है कि मदरसा बोर्ड भंग होने के बाद पहली बार सरकार की ओर से सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित कर इन मदरसों को प्रमाणपत्र वितरित किए जाएंगे. इससे जहां नई व्यवस्था के तहत पंजीकरण कराने वाले मदरसों को औपचारिक मान्यता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर बड़ी संख्या में मदरसों के अब तक रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में शामिल नहीं होने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.

उत्तराखंड में 1 जुलाई को भंग हो गया था मदरसा बोर्ड: दरअसल उत्तराखंड में 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड की व्यवस्थाएं पूरी तरह समाप्त कर दी गई थीं. इसके बाद मदरसों के संचालन और मान्यता के लिए नई व्यवस्था लागू की गई. अब मदरसों को उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक व्यवस्था के लिए गठित प्राधिकरण के तहत रजिस्ट्रेशन कराना है. इसके साथ ही उन्हें शिक्षा विभाग और उत्तराखंड बोर्ड से जुड़े निर्धारित मानकों और नियमों को पूरा करना होगा. सरकार की कोशिश है कि मदरसों को भी मुख्यधारा की शिक्षा व्यवस्था से जोड़ते हुए उनकी शैक्षणिक व्यवस्था, पाठ्यक्रम, आधारभूत सुविधाओं और अन्य जरूरी मानकों को व्यवस्थित किया जाए.

मदरसों के रजिस्ट्रेशन के लिए ऑनलाइन भी कर सकते हैं आवेदन: नई व्यवस्था के तहत मदरसों के लिए केवल धार्मिक शिक्षा तक सीमित व्यवस्था के बजाय शिक्षा से जुड़े निर्धारित मानकों को पूरा करना जरूरी होगा. संस्थानों को अपनी जानकारी और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने होंगे. रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही उन्हें नई व्यवस्था के तहत मान्यता मिल सकेगी. सरकार ने इसके लिए ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी शुरू की है, ताकि मदरसा संचालक निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन कर सकें.

अल्पसंख्यक कल्याण विशेष सचिव का बयान: अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव पराग मधुकर धकाते के मुताबिक-

नई व्यवस्था के तहत उत्तराखंड अल्पसंख्यक शैक्षणिक व्यवस्था के लिए प्राधिकरण का गठन किया गया है. इसी व्यवस्था के तहत मदरसों को भी रजिस्ट्रेशन कराना है और इसके लिए प्रक्रिया लगातार जारी है. करीब 200 मदरसों की ओर से ऑनलाइन आवेदन किया जा चुका है. बड़ी संख्या में मदरसे अब नई व्यवस्था के तहत आने की प्रक्रिया में हैं.
-पराग मधुकर धकाते, विशेष सचिव, अल्पसंख्यक कल्याण विभाग-

सरकार के सामने मदरसों को लेकर बड़ी चुनौती: हालांकि सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि प्रदेश में संचालित सभी मदरसों को नई व्यवस्था के तहत रजिस्ट्रेशन के दायरे में कैसे लाया जाए. मदरसा बोर्ड खत्म हुए करीब दो महीने का समय बीत चुका है, लेकिन अब तक केवल करीब 200 मदरसों के ऑनलाइन आवेदन सामने आए हैं. जबकि राज्य में इनकी संख्या अबतक 452 रही है. ऐसे में यह संकेत मिलता है कि अभी भी बड़ी संख्या में मदरसे या तो आवेदन की प्रक्रिया में आगे नहीं बढ़े हैं या फिर नई व्यवस्था के तहत जरूरी औपचारिकताएं पूरी नहीं कर पाए हैं.

ये है सरकार का तर्क: सरकार का तर्क है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य मदरसों को बंद करना नहीं, बल्कि उन्हें निर्धारित शैक्षणिक मानकों के दायरे में लाना है. जो संस्थान नियमों और मानकों को पूरा करेंगे, उन्हें रजिस्ट्रेशन और मान्यता दी जाएगी. वहीं जो मदरसे निर्धारित पात्रताओं को पूरा नहीं करते हैं, उनके सामने आगे संचालन को लेकर मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं.

22 मदरसों को प्रमाण पत्र जारी करने की तैयारी: अब करीब 22 मदरसों को प्रमाण पत्र जारी करने की तैयारी को नई व्यवस्था के पहले बड़े चरण के तौर पर देखा जा रहा है. सार्वजनिक कार्यक्रम में प्रमाणपत्र वितरण के जरिए सरकार यह संदेश भी देने की कोशिश करेगी कि मदरसा बोर्ड खत्म होने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था लागू हो चुकी है और उसके तहत संस्थानों को मान्यता देने का काम शुरू हो गया है. आने वाले दिनों में सरकार की चुनौती बाकी मदरसों को भी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में शामिल करने और नई व्यवस्था के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने की होगी.

गौरतलब है कि उत्तराखंड में मदरसों को अपना नया रजिस्ट्रेशन और मान्यता शिक्षा विभाग और नवगठित उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के पास कराना अनिवार्य कर दिया गया है.