चमोली जिले के भराड़ीसैंण स्थित उत्तराखंड विधानसभा में चल रहे बजट सत्र के पांचवें दिन रसोई गैस यानी एलपीजी को लेकर सदन के भीतर और बाहर जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। गैस सिलेंडरों की कथित कमी, कालाबाजारी और जमाखोरी के आरोपों को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरते हुए विधानसभा की सीढ़ियों पर धरना प्रदर्शन किया।
सत्र की शुरुआत होते ही विपक्ष ने प्रदेश में एलपीजी गैस की आपूर्ति में कमी और कालाबाजारी का मुद्दा उठाया। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य और कांग्रेस विधायक प्रीतम सिंह ने नियम 310 के तहत इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा की मांग की। हालांकि विधानसभा अध्यक्ष ऋतु खंडूड़ी ने इस विषय को नियम 58 के तहत भोजनावकाश के बाद सुनने का फैसला सुनाया।
विपक्ष ने इस निर्णय पर नाराजगी जताई और सदन के भीतर भी तीखी बहस शुरू हो गई। स्थिति इतनी गरम हो गई कि विधानसभा की कार्यवाही लगभग 45 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
सत्र दोबारा शुरू होने पर संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि एलपीजी गैस की आपूर्ति मुख्य रूप से केंद्र सरकार से जुड़ा विषय है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते केंद्र सरकार ने फिलहाल व्यावसायिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति पर रोक लगाई है, लेकिन घरेलू एलपीजी गैस की प्रदेश में कोई कमी नहीं है।
हालांकि विपक्ष सरकार के इस जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ। विपक्षी विधायकों का आरोप था कि प्रदेश के कई जिलों में लोगों को गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है। वहीं होटल, ढाबा और रेस्टोरेंट संचालकों को भी गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं।
विपक्ष ने इस मुद्दे पर सदन में विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए विरोध दर्ज कराया और अंततः सदन से वॉकआउट कर दिया।
इसी दौरान गैरसैंण में एक और राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला। विधायकों को देहरादून लौटने से रोकने की योजना बना रहे उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के कुछ नेताओं को पुलिस ने सघन सुरक्षा व्यवस्था के बीच गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार किए गए नेताओं को मेहलचौरी के प्राथमिक विद्यालय में बनाए गए अस्थायी जेल में रखा गया, जबकि कुछ नेताओं को एहतियातन हाउस अरेस्ट किया गया।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच सरकार ने जिलाधिकारियों को एलपीजी गैस की कालाबाजारी और जमाखोरी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। संसदीय कार्य मंत्री सुबोध उनियाल ने बताया कि नैनीताल जिले में गैस की कालाबाजारी के मामले में तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज की गई है।
एलपीजी संकट को लेकर प्रदेश की राजनीति फिलहाल गरमाई हुई है और माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा उत्तराखंड की राजनीति में और तेज हो सकता है।




Admin






