SIR पर कांग्रेस के सवालों को महापौर सौरभ थपलियाल ने बताया तथ्यहीन बोले—”आरोप से पहले आधिकारिक तथ्यों का जवाब दे कांग्रेस…!”
देहरादून, 28 सितंबर 2026। निर्वाचन प्रक्रिया और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए जा रहे सवालों के बीच देहरादून के महापौर सौरभ थपलियाल ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विपक्ष को सवाल उठाने का पूरा अधिकार है, लेकिन निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते समय राजनीतिक दलों को आधिकारिक दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों को भी सामने रखना चाहिए।
महापौर ने बिहार में हुए SIR का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग ने 24 जून 2025 को बिहार की सभी विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण का आदेश जारी किया था। निर्वाचन आयोग के अनुसार यह कदम संविधान के अनुच्छेद 324 और जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21(3) के तहत उठाया गया था। आयोग ने उस समय मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं को शामिल करने तथा अपात्र, मृत, स्थानांतरित या दोहराए गए नामों की पहचान जैसे उद्देश्यों का उल्लेख किया था।
बिहार SIR को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। 27 मई 2026 को Association for Democratic Reforms बनाम Election Commission of India मामले में सुप्रीम कोर्ट ने SIR की संवैधानिक और वैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं का निपटारा किया। न्यायालय ने माना कि बिहार में किया गया SIR जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और संबंधित नियमों के सीधे विरोध में नहीं था तथा निर्वाचन आयोग के पास ऐसी विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया शुरू करने की शक्ति है। न्यायालय ने यह भी कहा कि प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूचियों की शुद्धता, पूर्णता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करना था तथा अपनाए गए उपाय अनुपातहीन नहीं थे।
हालांकि, न्यायालय के फैसले में प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण सुरक्षा उपायों और नागरिकता संबंधी जांच की सीमाओं को भी स्पष्ट किया गया। इसलिए SIR को लेकर किसी भी राजनीतिक दावे का मूल्यांकन करते समय पूरे फैसले और उसके निर्देशों को देखना महत्वपूर्ण है।
महापौर सौरभ थपलियाल ने कहा कि कांग्रेस को SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों के आधार और उनसे संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों को जनता के सामने रखना चाहिए। उनके अनुसार, किसी संवैधानिक संस्था की प्रक्रिया पर सवाल उठाना और उस संस्था पर तथ्यहीन आरोप लगाना दो अलग-अलग बातें हैं।
उन्होंने कहा कि प्रशासनिक पत्रों, अधिकारियों की तैनाती या डेपुटेशन से जुड़े किसी दस्तावेज को SIR की व्यापक प्रक्रिया से जोड़ने से पहले उसके संदर्भ, तारीख और आधिकारिक रिकॉर्ड की जांच की जानी चाहिए। महापौर ने मीडिया रिपोर्टों के आधार पर राजनीतिक निष्कर्ष निकालने के बजाय संबंधित सरकारी दस्तावेज और आधिकारिक पक्ष देखने की बात कही।
मतदाता सूची की प्रक्रिया पर भी उठाया सवाल
महापौर ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन की प्रक्रिया को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से संबंधित कार्य निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत किए जाते हैं और पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल होना निर्वाचन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
निर्वाचन आयोग की नागरिक सेवा व्यवस्था में मतदाता पंजीकरण, नाम हटाने, आवेदन की स्थिति देखने, मतदाता सूची खोजने और अपील जैसी विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध हैं। SIR से संबंधित प्रक्रियाओं के लिए भी आयोग ने ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध कराई हैं।
BLO की भूमिका पर भी महापौर का बयान
महापौर ने Booth Level Officers यानी BLO की भूमिका को लेकर भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से बचने की बात कही। उन्होंने कहा कि चुनावी व्यवस्था में BLO जमीनी स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। यदि किसी मतदाता को प्रक्रिया के दौरान कोई वास्तविक शिकायत या समस्या होती है तो उसे निर्धारित शिकायत और अपील व्यवस्था के माध्यम से उठाया जाना चाहिए।
सेना और संवैधानिक संस्थाओं पर बयानबाजी को लेकर टिप्पणी
महापौर ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के पूर्व में EVM, सर्जिकल स्ट्राइक और बालाकोट एयरस्ट्राइक से संबंधित बयानों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सेना की कार्रवाई तथा निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका जैसी संवैधानिक संस्थाओं से जुड़े विषय संवेदनशील होते हैं और इन पर राजनीतिक दलों को सार्वजनिक बयान देते समय तथ्यात्मक जिम्मेदारी बरतनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति स्वाभाविक है, लेकिन संवैधानिक संस्थाओं की विश्वसनीयता से जुड़े सवालों को तथ्यों और प्रमाणों के साथ सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
2027 के चुनाव का भी किया उल्लेख
महापौर ने कहा कि चुनावी राजनीति में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी रह सकते हैं, लेकिन अंततः जनता के सामने राजनीतिक दलों को अपने दावों और बयानों का जवाब देना पड़ता है। उन्होंने कहा कि SIR और निर्वाचन प्रक्रिया को लेकर भी जनता के सामने तथ्य और आधिकारिक रिकॉर्ड रखे जाने चाहिए।
महापौर ने 2027 में जनता द्वारा राजनीतिक दलों के प्रदर्शन और उनके बयानों का मूल्यांकन किए जाने की बात कही। हालांकि, यह उनका राजनीतिक बयान है और इसे आगामी चुनाव के संभावित परिणाम के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
इस पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची की शुद्धता, पात्र मतदाताओं का समावेशन और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे हैं। ऐसे में SIR से संबंधित किसी भी दावे या आरोप को समझने के लिए निर्वाचन आयोग के आदेश, संबंधित मतदाता सूची प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के 27 मई 2026 के फैसले को प्राथमिक स्रोत के रूप में देखना अधिक उपयोगी होगा।
नोट: इस रिपोर्ट में कांग्रेस की ओर से किसी स्वतंत्र प्रतिक्रिया का दावा नहीं किया गया है, क्योंकि उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति में कांग्रेस का पक्ष शामिल नहीं है। कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया उपलब्ध होने पर उसे भी इसी रिपोर्ट में जोड़ा जाना चाहिए।













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