राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) टाइगर रिजर्व के लिए जारी फंड के खर्च ना होने को गंभीरता से लिया है.
देहरादून (उत्तराखंड): राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने उत्तराखंड में प्रोजेक्ट टाइगर के तहत जारी धनराशि के खर्च को लेकर चिंता जताई है. केंद्र सरकार ने 2 जुलाई 2026 को उत्तराखंड के लिए मदर सेक्शन जारी किया था, जिसके बाद पहली किस्त के तौर पर 5.31 करोड़ रुपये जारी किए गए. लेकिन 6 अगस्त 2026 तक राज्य ने इस राशि में से एक भी रुपया खर्च नहीं किया. खर्च का प्रतिशत शून्य दर्ज होने पर NTCA ने मुख्य सचिव को पत्र भेजकर राशि के उपयोग में तेजी लाने के निर्देश देने को कहा है.
उत्तराखंड में बाघ संरक्षण और टाइगर रिजर्व के प्रबंधन को लेकर एक गंभीर तस्वीर सामने आई है. राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण यानी एनटीसीए ने राज्य सरकार को पत्र भेजकर प्रोजेक्ट टाइगर के तहत जारी धनराशि के बेहद कम उपयोग पर चिंता जताई है. खास बात यह है कि केंद्र से पहली किस्त के तौर पर उत्तराखंड को 5.30 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जारी हो चुकी है, लेकिन अगस्त पहले हफ्ते तक राज्य सरकार की ओर से इस राशि में से एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया है.
एनटीसीए के सदस्य सचिव और अपर महानिदेशक वन संजय कुमार की ओर से उत्तराखंड के मुख्य सचिव को 10 अगस्त 2026 को भेजे गए पत्र में इस स्थिति पर ध्यान आकर्षित किया गया है. पत्र में बताया गया है कि केंद्र सरकार की Centrally Sponsored Scheme of Project Tiger & Elephant यानी CSS-PT&E के तहत राज्यों को टाइगर रिजर्व के प्रभावी प्रबंधन और संरक्षण के लिए आर्थिक सहायता दी जाती है. इस योजना के तहत बाघ संरक्षण के अलावा आवास प्रबंधन, बुनियादी ढांचे, निगरानी, वनाग्नि प्रबंधन, जल प्रबंधन और अन्य जरूरी कार्यों के लिए भी धन उपलब्ध कराया जाता है.
एनटीसीए के पत्र के अनुसार पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 2 जुलाई 2026 को उत्तराखंड के लिए मदर सेक्शन जारी कर धनराशि उपलब्ध कराई थी. इसके बाद राज्य को प्रोजेक्ट टाइगर और एलिफेंट के तहत पहली नेट रिलीज के रूप में 530.77 लाख रुपये, यानी करीब 5.31 करोड़ रुपये जारी किए गए. लेकिन 6 अगस्त 2026 तक राज्य का कुल व्यय शून्य रहा, यानी मदर सेक्शन के मुकाबले खर्च का प्रतिशत भी 0.00 फीसदी दर्ज किया गया है.
टाइगर रिजर्व क्षेत्र में बजट की बेहद ज्यादा जरूरत रहती है, यहां पर ऐसे कई काम होते हैं जिनके पूरा होने में कई बार बजट आड़े आता है. जो बजट टाइगर रिजर्व मिलता है, उसे समय पर खर्च किया जाना चाहिए.
-राजीव तलवार, ऑनरेरी वार्डन राजाजी टाइगर रिजर्व-एनटीसीए ने इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए कहा है कि जारी धनराशि का समय पर उपयोग योजना के तहत फंडिंग की निरंतरता के लिए बेहद जरूरी है. लगातार कम खर्च होने की स्थिति में भविष्य में मिलने वाली राशि पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इतना ही नहीं इसका असर योजना के तहत भविष्य के बजटीय आवंटन पर भी पड़ सकता है.
पत्र में यह भी स्पष्ट किया गया है कि समय पर राशि खर्च नहीं होने से प्रशासनिक और संचालन संबंधी दिक्कतें पैदा हो सकती हैं. इसका सीधा असर टाइगर रिजर्व में संरक्षण और प्रबंधन से जुड़े जरूरी कामों पर पड़ने की आशंका जताई गई है. खासकर बाघ सह-भक्षी वन्यजीव, शिकार प्रजातियों और उनके आवास की सुरक्षा से जुड़े कार्य प्रभावित हो सकते हैं. एनटीसीए ने उत्तराखंड सरकार से कहा है कि पहले से जारी धनराशि के मुकाबले खर्च की प्रक्रिया को तेज किया जाए. साथ ही स्वीकृत वार्षिक परिचालन योजना (Annual Plan of Operations) के तहत कामों को समय पर लागू करने के लिए संबंधित अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश जारी करने को कहा गया है.
प्राधिकरण ने यह भी कहा है कि यदि जारी राशि का समय पर उपयोग किया जाता है तो मंत्रालय की ओर से आगे धनराशि जारी करने का रास्ता आसान होगा. इसके साथ ही आने वाले वर्षों में राज्य के लिए पर्याप्त बजटीय सहायता सुनिश्चित करने में भी मदद मिलेगी. पत्र में भविष्य में राज्य को मिलने वाले बजट में अतिरिक्त धनराशि के आवंटन की संभावनाओं को भी इससे जोड़कर देखा गया है.
दरअसल उत्तराखंड में बाघ संरक्षण के लिहाज से कॉर्बेट और राजाजी जैसे टाइगर रिजर्व बेहद महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में केंद्र से मिलने वाली राशि का समय पर इस्तेमाल होना संरक्षण गतिविधियों की निरंतरता के लिए अहम है. अब एनटीसीए की आपत्ति के बाद राज्य के वन महकमे के सामने सबसे बड़ी चुनौती जारी 5.31 करोड़ रुपये की राशि का समयबद्ध उपयोग करने की है, ताकि न केवल मौजूदा कार्य प्रभावित न हों, बल्कि भविष्य में मिलने वाली केंद्रीय सहायता पर भी कोई असर न पड़े.











