2022-23 में जलाशयों, टैंक-तालाबों में मिलाकर 6.23 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध था, 2024-25 में ये 12.63 करोड़ क्यूबिक मीटर हुआ, नवीन उनियाल की रिपोर्ट
देहरादून: उत्तराखंड के जंगलों से जुड़ी एक अहम तस्वीर पहली बार सामने आई है. वन महकमे ने जंगलों में मौजूद जल संसाधनों की उपलब्धता का डाटा जुटाया है. इस डाटा से पहली बार यह पता चल पाया है कि जंगलों के भीतर मौजूद वाटर बॉडी में कितना पानी उपलब्ध है. साथ ही जंगलों में पानी बढ़ाने के लिए चलाए जा रहे प्रोजेक्ट्स का असर कितना हुआ है, इसकी भी तस्वीर सामने आई है.
जंगलों में उपलब्ध पानी का पहली बार जुटाया गया डाटा: उत्तराखंड के वन क्षेत्रों और उनसे जुड़े जल संसाधनों की स्थिति को लेकर सामने आए आंकड़े एक महत्वपूर्ण तस्वीर पेश करते हैं. साल 2022-23 से 2024-25 के बीच जलाशयों, टैंकों और तालाबों में उपलब्ध पानी की मात्रा में लगातार बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. खासतौर पर टैंक और तालाबों में उपलब्ध पानी तीन साल के दौरान करीब दोगुने से भी ज्यादा स्तर पर पहुंच गया है. वहीं जलाशयों में भी पानी की उपलब्धता में बढ़ोत्तरी हुई है.
बढ़ गया जंगलों में पानी: उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि जहां 2022-23 में जलाशयों और टैंक-तालाबों में मिलाकर करीब 6.23 करोड़ क्यूबिक मीटर पानी उपलब्ध था. वहीं 2024-25 में यह बढ़कर करीब 12.63 करोड़ क्यूबिक मीटर हो गया.
2022-2023 में पानी की उपलब्धता: आंकड़ों के मुताबिक साल 2022-23 में जलाशयों में पानी की उपलब्धता 0.000349725 BCM दर्ज की गई थी. इसे करोड़ क्यूबिक मीटर में बदलने पर यह मात्रा करीब 0.03497 करोड़ क्यूबिक मीटर बैठती है. इसी साल टैंक और तालाबों में उपलब्ध पानी 0.061904362 BCM, यानी करीब 6.19 करोड़ क्यूबिक मीटर था. इस तरह दोनों स्रोतों को मिलाकर उपलब्ध पानी करीब 6.23 करोड़ क्यूबिक मीटर रहा.
साल 2023-24 में पानी: इसके अगले साल यानी 2023-24 में जलाशयों में पानी की उपलब्धता बढ़कर 0.000622186 BCM, यानी करीब 0.06222 करोड़ क्यूबिक मीटर हो गई. वहीं टैंक और तालाबों में उपलब्ध पानी 0.105790749 BCM तक पहुंच गया, जो करीब 10.58 करोड़ क्यूबिक मीटर है. यानी एक साल में ही टैंक और तालाबों में उपलब्ध पानी में करीब 71 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई. जलाशयों की उपलब्धता में भी लगभग 78 प्रतिशत का इजाफा हुआ. दोनों स्रोतों को मिलाकर पानी की उपलब्धता 2023-24 में करीब 10.64 करोड़ क्यूबिक मीटर तक पहुंच गई.
साल 2024-25 के आंकड़े: वर्ष 2024-25 के आंकड़े इस बढ़ोत्तरी को और स्पष्ट करते हैं. इस साल जलाशयों में पानी की उपलब्धता 0.000889310 BCM, यानी करीब 0.08893 करोड़ क्यूबिक मीटर दर्ज की गई. वहीं टैंक और तालाबों में पानी की मात्रा 0.125445707 BCM, यानी करीब 12.54 करोड़ क्यूबिक मीटर रही. दोनों स्रोतों को मिलाने पर कुल उपलब्धता करीब 12.63 करोड़ क्यूबिक मीटर हो जाती है.
जलाशयों में 154 फीसदी पानी की वृद्धि हुई: इन आंकड़ों की तुलना करें तो 2022-23 के मुकाबले 2024-25 में टैंक और तालाबों में उपलब्ध पानी करीब 6.35 करोड़ क्यूबिक मीटर बढ़ा है. प्रतिशत के लिहाज से यह करीब 103 प्रतिशत की वृद्धि है. यानी दो साल की अवधि में इन जल स्रोतों में उपलब्ध पानी लगभग दोगुने से अधिक हो गया. दूसरी तरफ जलाशयों में उपलब्ध पानी भी करीब 0.054 करोड़ क्यूबिक मीटर बढ़ा है. प्रतिशत के लिहाज से जलाशयों की उपलब्धता में करीब 154 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.
पर्याप्त पानी घटाता है वन्यजीवों का खतरा: वन क्षेत्रों के लिहाज से इन आंकड़ों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है, क्योंकि जंगलों में मौजूद छोटे-बड़े जल स्रोत वन्यजीवों, वनस्पतियों और आसपास के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. गर्मियों के दौरान प्राकृतिक जल स्रोतों में कमी आने पर जलाशय, तालाब और अन्य जल संरचनाएं वन्यजीवों के लिए पानी का अहम आधार बनती हैं. पर्याप्त जल उपलब्धता होने से वन्यजीवों को पानी की तलाश में जंगल से बाहर आबादी वाले क्षेत्रों की ओर जाने की जरूरत कम हो सकती है. इसका सीधा संबंध मानव-वन्यजीव संघर्ष को नियंत्रित करने की कोशिशों से भी जुड़ता है.
गर्मियों में वन्यजीवों के लिए जीवन रेखा हैं ये जलस्रोत: वन क्षेत्र में पानी की उपलब्धता को केवल पेयजल या सिंचाई के नजरिये से देखने के बजाय इसे पारिस्थितिकी और वन्यजीव संरक्षण से भी जोड़कर देखा जाना जरूरी है. जंगलों में छोटे जलाशय, तालाब और अन्य जल संरचनाएं गर्मियों के कठिन समय में वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा का काम कर सकती हैं. खासकर ऐसे इलाकों में जहां प्राकृतिक स्रोत मौसमी हैं, वहां इन संरचनाओं में पानी का बने रहना वन्यजीवों की आवाजाही और उनके आवास की स्थिति को प्रभावित कर सकता है.
तीन सालों में बढ़ा गया पानी: तीन सालों के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव टैंक और तालाबों की श्रेणी में दिखाई देता है. 2022-23 में जहां यह मात्रा करीब 6.19 करोड़ क्यूबिक मीटर थी, वहीं 2023-24 में बढ़कर 10.58 करोड़ और 2024-25 में 12.54 करोड़ क्यूबिक मीटर हो गई. यानी लगातार दो वर्षों में इसमें बढ़ोत्तरी हुई. जलाशयों में भी यही रुझान देखने को मिला, हालांकि उनकी कुल मात्रा टैंक और तालाबों की तुलना में काफी कम रही.
जल प्रबंधन की संभावनाएं दिखाते आंकड़े: ऐसे में इन आंकड़ों को वन क्षेत्र में जल संरक्षण की संभावनाओं से जोड़कर देखा जा सकता है. यदि वन क्षेत्रों और वन्यजीव आवासों में मौजूद जल संरचनाओं का नियमित रखरखाव, वर्षा जल का संरक्षण और प्राकृतिक जल स्रोतों का पुनर्जीवन किया जाए तो गर्मियों में पानी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिल सकती है. साथ ही भविष्य में जल उपलब्धता के आंकड़ों को वन क्षेत्रवार और जल स्रोतवार दर्ज किया जाए तो यह पता लगाना भी आसान होगा कि किन वन प्रभागों या वन्यजीव क्षेत्रों में पानी की स्थिति बेहतर है और किन क्षेत्रों में अतिरिक्त जल संरक्षण उपायों की जरूरत है.
क्या कहते हैं एपीसीसीएफ: इस मामले में APCCF विवेक पाडे कहते हैं कि-
जंगलों में पानी की उपलब्धता कई मायनों में बेहद जरूरी है. वन क्षेत्र में नमी बनाए रखने के साथ वन्यजीवों के लिए पानी की उपलब्धता काफी जरूरी होती है, जिसके लिए वन विभाग लगातार काम करता रहा है.
-विवेक पाडे, APCCF वाइल्डलाइफ-
क्या कहते हैं राजाजी टाइगर रिजर्व के ऑनरेरी वार्डन: राजाजी टाइगर रिजर्व के ऑनरेरी वार्डन राजीव तलवार कहते हैं कि-
जंगलों में विभिन्न प्रोजेक्ट चल रहे हैं और इसमें जंगलों के भीतर पानी की उपलब्धता को बढ़ाने का प्रयास होता रहा है. अच्छी बात यह है कि इसका असर भी देखने को मिल रहा है. तमाम वन क्षेत्र में अमृत सरोवर के साथ दूसरी वाटर बॉडी भी तैयार की जा रही हैं.
-राजीव तलवार, ऑनरेरी वार्डन, राजाजी टाइगर रिजर्व-
साल 2022-23 से 2024-25 के बीच उपलब्ध आंकड़े जलाशयों तथा टैंक-तालाबों में पानी की उपलब्धता में लगातार वृद्धि की ओर इशारा करते हैं. तीन सालों में इन दोनों श्रेणियों की संयुक्त उपलब्धता करीब 6.23 करोड़ से बढ़कर 12.63 करोड़ क्यूबिक मीटर हो गई है, जो वनों और वन्यजीवों के लिहाज से बहुत अच्छा संकेत है.










