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उत्तराखंड एसआईआर, ECI का ये टूल डुप्लीकेट वोटरों का करेगा सफाया, कांग्रेस ने उठाए सवाल

उत्तराखंड में एसआईआर के दौरान मतदाताओं की डुप्लीकेसी न हो, इसके लिए उत्तराखंड मुख्य निर्वाचन अधिकारी बड़ा कदम उठाने जा रहे है.

देहरादून: उत्तराखंड में मतदाता सूची में डुप्लीकेसी रोकने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग से डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज और फोटो सिमिलर एंट्रीज टूल उपलब्ध कराने की मांग की है. इस टूल के जरिए एक ही मतदाता का अलग-अलग विधानसभा या राज्यों की मतदाता सूची में दर्ज नाम पहचानने में मदद मिलेगी. डुप्लीकेट प्रविष्टि मिलने पर संबंधित मतदाता को नोटिस देकर उसका पक्ष सुना जाएगा और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही नाम हटाने का निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल भारत निर्वाचन आयोग को इसके लिए पत्र भेजा गया है. अनुमति मिलने के बाद ही उत्तराखंड में इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल शुरू किया जा सकेगा.

उत्तराखंड में मतदाता सूचियों को और अधिक पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की दिशा में निर्वाचन आयोग ने एक अहम पहल की है. प्रदेश में मतदाता सूची में डुप्लीकेसी की पहचान और उसे रोकने के लिए मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने भारत निर्वाचन आयोग से विशेष सॉफ्टवेयर टूल उपलब्ध कराने की मांग की है. इसके लिए भारत निर्वाचन आयोग को बाकायदा पत्र भेजकर डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज और फोटो सिमिलर एंट्रीज टूल उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है.

दरअसल, मतदाता सूची तैयार करने और उसके लगातार अपडेट की प्रक्रिया में कई बार एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज हो जाता है. यह स्थिति एक ही विधानसभा के अलग-अलग बूथों से लेकर दूसरी विधानसभा और यहां तक कि दूसरे राज्यों की मतदाता सूची में भी सामने आ सकती है. ऐसे मामलों की पहचान करना निर्वाचन विभाग के लिए एक चुनौती होती है.

डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज और फोटो सिमिलर एंट्रीज टूल की मांग: खास तौर पर बड़ी संख्या में मतदाताओं वाली सूचियों में केवल नाम के आधार पर डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान करना आसान नहीं होता. इसी समस्या को देखते हुए भारत निर्वाचन आयोग के स्तर पर इस्तेमाल किए जाने वाले डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज और फोटो सिमिलर एंट्रीज टूल की मांग उत्तराखंड ने की है.

पहचान के लिए एक प्रभावी तकनीकी: डेमोग्राफिक सिमिलर एंट्रीज के जरिए मतदाताओं से जुड़ी समान जानकारी के आधार पर संभावित डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान की जा सकती है. वहीं फोटो सिमिलर एंट्रीज टूल के माध्यम से मतदाता की तस्वीर के आधार पर भी समान प्रविष्टियों को चिन्हित करने में मदद मिलती है. इसका फायदा यह होगा कि यदि कोई व्यक्ति एक से अधिक स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज है, तो निर्वाचन विभाग के सामने ऐसे मामलों की पहचान के लिए एक प्रभावी तकनीकी माध्यम उपलब्ध होगा.

नोटिस भेजकर जाना जाएगा मतदाता का पक्ष: उदाहरण के तौर पर यदि किसी मतदाता का नाम उत्तराखंड की एक विधानसभा के साथ ही किसी दूसरी विधानसभा की मतदाता सूची में दर्ज है, तो ऐसे मामलों को चिन्हित किया जा सकेगा. इसी तरह यदि किसी व्यक्ति का नाम किसी दूसरे राज्य की मतदाता सूची में भी दर्ज है, तो संभावित डुप्लीकेसी की जांच की जा सकती है. केवल सॉफ्टवेयर के जरिए किसी मतदाता का नाम सीधे मतदाता सूची से हटाने की प्रक्रिया नहीं होगी. डुप्लीकेट प्रविष्टि की पहचान होने के बाद संबंधित मतदाता की स्थिति की जांच की जाएगी. मतदाता को नोटिस भेजकर पूरे मामले की जानकारी दी जाएगी और उसका पक्ष भी जाना जाएगा.

संबंधित व्यक्ति से पूछताछ और आवश्यक सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद ही नाम हटाने को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. निर्वाचन विभाग का मकसद तकनीक के इस्तेमाल से मतदाता सूची की गुणवत्ता में सुधार करना है, ताकि एक ही व्यक्ति का नाम एक से अधिक स्थानों पर दर्ज रहने की स्थिति को रोका जा सके. इसके साथ ही वास्तविक मतदाताओं के अधिकार भी सुरक्षित रहें और बिना उचित प्रक्रिया के किसी मतदाता का नाम सूची से न हटे, इसका भी ध्यान रखा जाएगा. फिलहाल उत्तराखंड में इस टूल का इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है.

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय की ओर से भारत निर्वाचन आयोग को इसकी मांग भेजी गई है.

भारत निर्वाचन आयोग की अनुमति और आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद ही प्रदेश में इस सॉफ्टवेयर को इस्तेमाल में लाया जा सकेगा. अनुमति मिलने पर यह व्यवस्था मतदाता सूची के सत्यापन और डुप्लीकेट प्रविष्टियों की पहचान में निर्वाचन विभाग के लिए महत्वपूर्ण तकनीकी मददगार साबित हो सकती है.
-विजय कुमार जोगदंडे, ACEO, निर्वाचन आयोग-

इसको लेकर तमाम राजनीतिक दलों को भी आयोग की तरफ से जानकारी दी गई है और यह बताया गया है कि आयोग किस तरह से डुप्लीकेसी को रोकने के लिए अब तकनीक का भी इस्तेमाल करने का प्रयास करने जा रहा है. हालांकि इसमें भारत निर्वाचन आयोग की अनुमति का इंतजार है, लेकिन यदि इसमें अनुमति मिल जाती है तो सॉफ्टवेयर के माध्यम से ही आसानी से मतदाताओं की डुप्लीकेसी की समस्या का हल निकल सकेगा.

कांग्रेस ने जताया अपना एतराज: खास बात यह है कि मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने इस बात पर भी निर्वाचन आयोग के अधिकारियों की जमकर क्लास ली.. कांग्रेस का कहना है कि SIR का काम काफी हद तक अंतिम चरण तक पहुंच चुका है, ऐसे में अब जाकर आयोग को इस बात की याद आई है कि डुप्लीकेसी को रोकने के लिए किसी सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जाना चाहिए. कांग्रेस कहती है कि आयोग पूरी तरह से सरकार के दबाव में काम कर रहा है.