फ्रांस में सितंबर में शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों के बाद से विरोध- प्रदर्शनों का दौर जारी है.
पेरिस: फ्रांस में गुरुवार को हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ. इस दौरान लाखों लोग अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतरे. देश येलो वेस्ट मूवमेंट, ट्रेड यूनियनों, छात्रों और अलग-अलग सेक्टर के मजदूरों की हड़ताल की तैयारी कर रहा है. फ्रांस 24 की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रेड यूनियनों ने गुरुवार को फ्रांस में ज्यादा सैलरी की मांग और हाई स्कूल प्रोटेस्ट मूवमेंट के सपोर्ट में प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया.
गुरुवार को हुए विरोध प्रदर्शन फ्रांसीसी सांसदों द्वारा 2027 के बजट बिल के पहले भाग को अस्वीकार करने के बाद हुए. यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस सरकार का ओरिजिनल बजट प्रपोजल अब सीनेट के सामने पेश किया जाएगा. इस पर 9 दिसंबर को वोटिंग होगी. इसके बाद एक पार्लियामेंट्री कमेटी इस कानून को नेशनल असेंबली में दोबारा पेश करने से पहले समझौता कराने की कोशिश करेगी.
फ्रांस में कई हफ़्तों से विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं, जो सितंबर में शुरू हुए छात्र प्रदर्शनों के कारण भीड़भाड़ वाली कक्षाओं, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में प्रवेश पाने में आने वाली समस्याओं के खिलाफ हुए. इसके बाद से विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए हैं क्योंकि ट्रेड यूनियनों ने स्टूडेंट्स की मांगों का समर्थन किया है और महंगाई और फ्यूल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ मार्च निकाले हैं.
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने कहा कि गुरुवार को 70,000 से ज़्यादा पुलिस वाले तैनात किए जाएंगे. यूरो न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि सिक्योरिटी फोर्स का मुख्य मिशन यह पक्का करना है कि विरोध प्रदर्शन शांति से और बिना किसी घटना के हों.
नुनेज ने बताया कि इंटेलिजेंस सर्विस को कट्टर लेफ्ट मूवमेंट और हिंसक प्रोटेस्ट ग्रुप्स से काफी दिलचस्पी मिली है, जिनके कई मकसद हो सकते हैं. अशांति फैलाने के लिए उनमें हिस्सा लेना, बिना इजाजत के मार्च ऑर्गनाइज करना और बिजनेस या पब्लिक बिल्डिंग्स को निशाना बनाकर लूटपाट और तोड़-फोड़ करना.
फ्रांस के अधिकारियों ने पेरिस में ट्रेड यूनियनों के प्रस्तावित विरोध के रास्ते पर रोक लगा दी और दूसरे रास्ते पर विरोध करने की इजाजत दे दी. रिपोर्ट के मुताबिक फ्रांस के अधिकारियों का यह फैसला 17-18 अक्टूबर को हुई हिंसक घटनाओं के बाद सरकार द्वारा उठाए गए सुरक्षा उपायों के बीच आया है, जहां शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शनों के दौरान हिंसा और लूटपाट हुई थी.
ट्रेड यूनियनों और अधिकार समूहों ने विरोध प्रदर्शनों को रोकने के लिए लगाए गए बहुत ज़्यादा पुलिसिंग और तानाशाही उपायों की आलोचना की है. फ्रांस की पुलिस पर भी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बहुत ज़्यादा बल इस्तेमाल करने के आरोप लगे हैं.
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