उत्तराखंड की चारधाम यात्रा हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है, लेकिन यात्रा मार्गों पर लगातार बढ़ रहे दबाव को देखते हुए सरकार ने कई महत्वपूर्ण बाईपास योजनाएं प्रस्तावित की थीं। इन योजनाओं का उद्देश्य यात्रा मार्ग को कम भीड़भाड़, सुरक्षित और समयबद्ध बनाना था। हालांकि, ये योजनाएं अब प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझकर अटक गई हैं।
सूत्रों के अनुसार गंगोत्री, केदारनाथ और बदरीनाथ मार्गों पर प्रस्तावित 5 से अधिक बाईपास रूट अभी तक भूमि अधिग्रहण, पर्यावरण मंजूरी और सर्वेक्षण प्रक्रिया के कारण ठप हैं। नतीजतन, मौजूदा संकरे और टूटे-फूटे मार्गों पर भारी यात्री दबाव बना हुआ है।
इस बार की यात्रा के शुरुआती चरण में ही कई जगहों पर जाम की स्थिति, बीमार यात्रियों को समय पर मदद न मिलना, और रास्ते में लंबा इंतजार जैसी समस्याएं सामने आ चुकी हैं। स्थानीय प्रशासन भी मानता है कि यदि बाईपास मार्ग तैयार हो जाते, तो इन समस्याओं में काफी कमी आ सकती थी।
चारधाम परियोजना से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि "कई प्रस्ताव केंद्र सरकार की मंजूरी के इंतजार में हैं। प्रयास किया जा रहा है कि जरूरी प्रक्रिया को तेज किया जाए।" उधर, तीर्थ पुरोहित और स्थानीय प्रतिनिधियों का कहना है कि सरकार को यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को प्राथमिकता देते हुए इन परियोजनाओं को शीघ्रता से लागू करना चाहिए।
वर्तमान स्थिति यह है कि यात्रा के सुगम संचालन का सपना अभी भी फ़ाइलों में दफन है, जबकि ज़मीन पर श्रद्धालु कठिनाइयों से जूझ रहे हैं।



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