उत्तराखंड के चमोली जिले के माणा गांव के पास शुक्रवार सुबह 5:30 से 6:00 बजे के बीच एक भीषण हिमस्खलन ने सीमा सड़क संगठन (BRO) के कैंप को अपनी चपेट में ले लिया। इस हादसे में 55 मजदूर बर्फ के नीचे दब गए थे। अब तक 47 मजदूरों को सुरक्षित बचा लिया गया है, जबकि 8 की तलाश जारी है।
हिमस्खलन के समय मजदूर आठ कंटेनरों और एक शेड में ठहरे हुए थे। कुछ मजदूरों ने बताया कि जब बर्फ का सैलाब आया, तो कंटेनर लगभग 50 से 60 मीटर नीचे खिसक गए। कई मजदूरों ने कंटेनरों की मजबूती और सीमित ऑक्सीजन की उपलब्धता के कारण जीवित रहने में सफलता पाई।
रेस्क्यू ऑपरेशन में भारतीय सेना, ITBP, NDRF और SDRF की टीमें जुटी हुई हैं। बचाव कार्य में हेलीकॉप्टर, ड्रोन, थर्मल इमेजिंग कैमरे और स्निफर डॉग्स की मदद ली जा रही है। अब तक 47 मजदूरों को सुरक्षित निकालकर जोशीमठ के अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को जोशीमठ पहुंचकर हवाई सर्वेक्षण किया और घायल मजदूरों से मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बचाव कार्य में कोई कमी न रहे और सभी संसाधनों का पूर्ण उपयोग किया जाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी मुख्यमंत्री से बात कर केंद्र सरकार की ओर से हर संभव सहायता का आश्वासन दिया है।
मौसम की प्रतिकूलता के बावजूद बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी है। अधिकारियों को उम्मीद है कि शेष 8 मजदूरों को भी शीघ्र ही सुरक्षित निकाल लिया जाएगा।



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