उत्तराखंड सरकार ने राज्य में अवैध रूप से संचालित 52 मदरसों को 15 दिनों के भीतर सील कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में चलाए गए इस अभियान का उद्देश्य बिना पंजीकरण और अनुमति के चल रहे धार्मिक शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई करना है। सरकार का कहना है कि ये मदरसे उत्तराखंड मदरसा बोर्ड में पंजीकृत नहीं थे और इनके भवनों के नक्शे भी संबंधित विकास प्राधिकरण से स्वीकृत नहीं थे ।
इस कार्रवाई के तहत देहरादून जिले के विकासनगर में 12 और खटीमा में 9 मदरसों को सील किया गया है। इससे पहले विभिन्न जिलों में 31 मदरसों पर भी कार्रवाई की गई थी । सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 200 से अधिक मदरसे बिना पंजीकरण के संचालित हो रहे थे, जिनमें सबसे अधिक 129 मदरसे ऊधम सिंह नगर में पाए गए ।
हालांकि, इस कदम का मुस्लिम समुदाय और विभिन्न संगठनों ने विरोध किया है। उत्तराखंड मुस्लिम सेवा संगठन के अध्यक्ष नईम कुरैशी और इमाम संगठन के अध्यक्ष मुफ्ती रईस अहमद कासमी ने इस कार्रवाई को "असंवैधानिक" बताया है और कहा है कि यह समुदाय को निशाना बनाने का प्रयास है । बहुजन समाज पार्टी की प्रमुख मायावती ने भी इस कदम की आलोचना करते हुए इसे "पूर्वाग्रही" और "गैर-धर्मनिरपेक्ष" करार दिया है ।
मुख्यमंत्री धामी ने स्पष्ट किया है कि राज्य की सांस्कृतिक और कानूनी व्यवस्था से छेड़छाड़ बर्दाश्त नहीं की जाएगी और अवैध गतिविधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी ।
इस कार्रवाई से सैकड़ों छात्रों की शिक्षा प्रभावित हुई है, जो इन मदरसों में पढ़ाई कर रहे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ प्रभावित छात्रों की शिक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान देना चाहिए, ताकि उनका शैक्षणिक भविष्य सुरक्षित रह सके।



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