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post authorAdmin 16 Mar 2025

लालकुआं-नेपाल हाथी कॉरिडोर में 8 वर्षों में 11 हाथियों की मौत, प्लास्टिक कचरे से बढ़ी चिंता.

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के लालकुआं से नेपाल तक फैला हाथी कॉरिडोर वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण मार्ग है, लेकिन पिछले आठ वर्षों में यहां 11 हाथियों की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो चुकी है। इन घटनाओं में एक सामान्य कारण सामने आया है—हाथियों के पेट में पॉलीथिन, प्लास्टिक की प्लेटें और तेल लगे पॉलीथिन जैसे कचरे पाए गए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये कचरे ट्रेन यात्रियों द्वारा खिड़की से बाहर फेंके जाते हैं, जिन्हें हाथी खाने के लिए ट्रैक पर आते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, लालकुआं-रुद्रपुर के बीच सबसे अधिक गंदगी फेंकी जाती है, जिससे हाथी इन कचरों को निगल जाते हैं। इसके अलावा, हाथी खाने के लिए पटरी पर आते हैं और ट्रेन की चपेट में आ जाते हैं। इस समस्या से निपटने के लिए वन विभाग और रेलवे विभाग ने मिलकर चेतावनी उपकरण लगाने की योजना बनाई है, ताकि हाथियों के ट्रैक पर आने से पहले ही अलर्ट मिल सके। इसके साथ ही, ट्रेनों की गति को भी कम किया जाएगा। 

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इस समस्या का समाधान केवल तकनीकी उपायों से नहीं, बल्कि यात्रियों की जागरूकता से भी संभव है। यदि यात्री ट्रेन के अंदर और बाहर कचरा न फेंके, तो हाथियों की मौत की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है। इसके अलावा, हाथी कॉरिडोर में फेंसिंग और अंडरपास जैसे संरचनात्मक उपाय भी आवश्यक हैं।