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post authorAdmin 17 Mar 2025

3300 पेड़ों की कटाई के विरोध में महिलाओं ने शुरू किया ‘चिपको आंदोलन 2.0’, पर्यावरण सुरक्षा को लेकर उठाई बड़ी मांगें.

उत्तराखंड के भानियावाला-ऋषिकेश मार्ग चौड़ीकरण परियोजना के तहत प्रस्तावित 3300 पेड़ों की कटाई के विरोध में स्थानीय महिलाओं और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने 'चिपको आंदोलन 2.0' की शुरुआत की है। यह आंदोलन ऐतिहासिक चिपको आंदोलन की तर्ज पर किया जा रहा है, जिसमें महिलाएं पेड़ों से चिपककर उनकी रक्षा का संकल्प लेती हैं।

इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व पर्यावरणविदों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने किया, जिसमें पद्मश्री सम्मानित डॉ. माधुरी बड़थ्वाल, मैती आंदोलन के संस्थापक पद्मश्री कल्याण सिंह रावत, लोकगायिका कमला देवी, जागर गायिका बसंती देवी, जलवायु रक्षक सूरज सिंह नेगी और शोधकर्ता नितिन मलेथा जैसे नाम शामिल रहे। कार्यक्रम में महिलाओं ने वृक्ष पूजन कर गौरा देवी के रूप में शपथ ली और एक हस्ताक्षर अभियान चलाया।

प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में शामिल है – ऋषिकेश-जौलीग्रांट हाईवे पर पेड़ कटाई पर तत्काल रोक, देहरादून के पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में व्यावसायिक वन उपयोग पर प्रतिबंध, रिस्पना, बिंदाल और सौंग नदियों का पुनर्जीवन, और हर नई परियोजना में कम से कम 25% भूमि हरित क्षेत्र के लिए आरक्षित करने का प्रावधान।

यह आंदोलन केवल पेड़ों की रक्षा नहीं, बल्कि उत्तराखंड में सतत विकास के मॉडल की आवश्यकता को उजागर करता है। आंदोलनकारियों ने सरकार को चेताया कि यदि प्रस्तावित परियोजना को वापस नहीं लिया गया, तो यह विरोध राज्यव्यापी रूप ले सकता है।