चारधाम तीर्थ पुरोहित महापंचायत ने उत्तराखंड सरकार के उस निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई है, जिसमें धर्मस्व विभाग को पर्यटन विभाग में विलय किया गया है। देहरादून स्थित एक होटल में महापंचायत की बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता सुरेश सेमवाल ने की। बैठक में चारधाम यात्रा 2025 की तैयारियों और तीर्थ स्थलों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
महापंचायत ने स्पष्ट कहा कि धार्मिक मामलों को पर्यटन के दायरे में लाना सनातन परंपरा और श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ है। तीर्थ पुरोहितों का मानना है कि धर्म, आस्था और रीति-रिवाजों का संचालन स्वतंत्र रूप से होना चाहिए, न कि पर्यटन जैसे प्रशासनिक ढांचे के अंतर्गत। इसीलिए सरकार से मांग की गई है कि धर्मस्व विभाग को पुनः स्वतंत्र किया जाए।
इसके साथ ही, महापंचायत ने आगामी चारधाम यात्रा में तीर्थयात्रियों की संख्या को सीमित करने की किसी भी योजना का विरोध करने का निर्णय लिया है। महापंचायत ने यात्रियों के लिए बेहतर व्यवस्थाओं की मांग की, न कि संख्या पर अंकुश लगाने की।
बैठक में केदारनाथ हेली सेवा में हो रही अनियमितताओं पर चिंता जताई गई और मांग की गई कि हेली सेवा कंपनियों के पास ही विजिलेंस कार्यालय स्थापित किया जाए, ताकि पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित हो सके। यमुनोत्री धाम में सुरक्षा दीवार का निर्माण कार्य जल्द शुरू करने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई।
बैठक में राज्य भर से जुड़े कई मंदिर समितियों और तीर्थ पुरोहित संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने एक स्वर में इन मांगों का समर्थन किया।



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