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post authorAdmin 21 Mar 2025

आधार कार्ड में दर्ज पते ने उत्तराखंड के कई निवासियों को बनाया बाहरी, भू-कानून लागू होने से पुश्तैनी ज़मीन पर संकट.

उत्तराखंड में हाल ही में लागू किए गए संशोधित भू-कानून के कारण राज्य के कई निवासी, जो रोजगार या अन्य कारणों से बाहर गए थे, अब अपनी पुश्तैनी ज़मीनों पर संकट महसूस कर रहे हैं। इन लोगों के आधार कार्ड में अन्य राज्यों के पते दर्ज होने के कारण उन्हें बाहरी माना जा रहा है, जिससे उनकी ज़मीनों पर सरकारी कब्जे की कार्रवाई की जा रही है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर जिला प्रशासन ने भू-कानून का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए हैं। जिलाधिकारी सविन बंसल ने सभी उप जिलाधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे भूमि खरीद में नियमों के उल्लंघन की रिपोर्ट तैयार करें और ऐसे बाहरी लोगों की सूची बनाएं जिन्होंने 250 वर्ग मीटर से अधिक आवासीय या कृषि भूमि खरीदी है। जांच में सामने आया कि 393 लोगों ने नियमों का उल्लंघन किया, जिनमें से लगभग 300 मामलों में कार्रवाई की गई है। 200 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर सरकारी कब्जे के नोटिस जारी किए गए हैं।

यह स्थिति उन निवासियों के लिए चिंता का विषय बन गई है जो वर्षों से राज्य के बाहर रहकर काम कर रहे हैं। आधार कार्ड में अन्य राज्य का पता दर्ज होने के कारण उन्हें बाहरी माना जा रहा है, जबकि उनकी पुश्तैनी ज़मीनें राज्य में हैं। अब उन्हें यह साबित करना पड़ रहा है कि वे उत्तराखंड के मूल निवासी हैं और उनकी ज़मीनों पर उनका ही अधिकार है।

जिला प्रशासन ने ऐसे सभी लोगों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। यदि वे अपनी नागरिकता और ज़मीन के स्वामित्व को प्रमाणित करने में सफल नहीं होते, तो उनकी ज़मीनों पर सरकारी कब्जा लिया जाएगा। यह स्थिति राज्य के निवासियों के लिए एक गंभीर चुनौती बन गई है, और वे प्रशासन से न्याय की उम्मीद कर रहे हैं।