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post authorAdmin 14 May 2025

Chardham Yatra: भारत-पाक तनाव और विपरीत परिस्थितियों का असर, चारधाम यात्रा में 32% की गिरावट.

चारधाम यात्रा को शुरू हुए दो सप्ताह से अधिक हो चुके हैं, लेकिन यह अभी तक अपने चरम पर नहीं पहुंच सकी है। भारत-पाक तनाव, मौसम की अनिश्चितता और स्थानीय चुनौतियों के चलते इस वर्ष यात्रा की रफ्तार धीमी रही है। 30 अप्रैल से शुरू हुई यात्रा में अब तक (13 मई तक) कुल 6,05,183 श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे हैं, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में 8,85,733 श्रद्धालु आए थे। यह 32 प्रतिशत की गिरावट को दर्शाता है।

हालांकि मई महीने को हमेशा से यात्रा का चरम समय माना जाता है और बीते वर्ष भी इसी महीने के दूसरे पखवाड़े में यात्रियों की संख्या सबसे अधिक रही थी। इस वर्ष भी यही उम्मीद की जा रही है। पिछले चार दिनों में यात्रियों की संख्या में कुछ वृद्धि देखी गई है, जो स्थिति के सामान्य होने का संकेत है।

यात्रा पर असर डालने वाले प्रमुख कारणों में 7 मई को पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद की आशंकाएं, केदारनाथ मार्ग पर खच्चरों की मौत के चलते हुई अस्थायी रोक और मौसम की अनिश्चितता शामिल हैं। इन सबने श्रद्धालुओं के मन में भ्रम की स्थिति उत्पन्न की, जिससे पंजीकरण के बावजूद कई लोग यात्रा पर नहीं आ सके।

गढ़वाल मंडल के आयुक्त विनय शंकर पांडेय का कहना है कि यात्रा पूरी तरह से सुचारू रूप से संचालित हो रही है और श्रद्धालुओं की संख्या अब बढ़ रही है। वहीं श्री केदारधाम होटल एसोसिएशन के सचिव नितिन जमलोकी ने बताया कि इस बार एडवांस बुकिंग बेहद कम रही, जिससे छोटे व्यापारियों को नुकसान हुआ।

सामाजिक विश्लेषक अनूप नौटियाल का कहना है कि यदि यात्रा अपने चरम पर नहीं पहुंचती है, तो सरकार को सभी हितधारकों से संवाद स्थापित कर ठोस समाधान निकालना होगा। आने वाला सप्ताह चारधाम यात्रा के भविष्य की दिशा तय कर सकता है।