उत्तराखंड में जेलों की क्षमता संकट को देखते हुए राज्य सरकार ने तीन नई जेलों के निर्माण और सितारगंज सेंट्रल जेल के विस्तार की योजना को मंजूरी दे दी है। राज्य की जेलों में वर्तमान में क्षमता से अधिक 6,603 कैदी बंद हैं, जबकि स्वीकृत क्षमता केवल 3,461 की है, जो लगभग दोगुना है।
नई जेलों का निर्माण चंपावत, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों में किया जाएगा। उत्तरकाशी में भूमि उपलब्ध हो चुकी है, जबकि चंपावत और पिथौरागढ़ में निर्माण के लिए मंजूरी मिल चुकी है। इसके अलावा, सितारगंज सेंट्रल जेल में 300 अतिरिक्त बैरिक बनाने की योजना है, जिससे इसकी क्षमता बढ़कर 552 से 852 हो जाएगी।
राज्य की जेलों में सबसे अधिक भीड़ हल्द्वानी उपकारागार में है, जहां 555 की क्षमता के मुकाबले 1,502 कैदी बंद हैं। इसके बाद देहरादून जिला जेल (580 क्षमता, 1,499 कैदी), अल्मोड़ा जिला जेल (102 क्षमता, 354 कैदी) और हरिद्वार जिला जेल (888 क्षमता, 1,340 कैदी) का स्थान है।
यह कदम राज्य में जेलों की क्षमता बढ़ाने और कैदियों की भीड़ को कम करने के लिए महत्वपूर्ण है। नए जेलों के निर्माण से न केवल कैदियों की संख्या में संतुलन आएगा, बल्कि जेलों में सुधारात्मक सुविधाओं को भी बेहतर किया जा सकेगा।



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