दिल्ली हाईकोर्ट ने योग गुरु बाबा रामदेव के 'रूह अफजा' को लेकर दिए गए 'शरबत जिहाद' बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। कोर्ट ने इसे 'अक्षम्य' और 'न्यायालय की अंतरात्मा को झकझोरने वाला' करार देते हुए बाबा रामदेव से भविष्य में ऐसे भड़काऊ या धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बयानों से बचने का निर्देश दिया है।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब बाबा रामदेव ने 3 अप्रैल 2025 को एक वीडियो में दावा किया कि 'रूह अफजा' की बिक्री से होने वाली आय का उपयोग मस्जिदों और मदरसों के निर्माण में किया जाता है। उन्होंने इसे 'शरबत जिहाद' का हिस्सा बताया, जो कि धार्मिक आधार पर भड़काऊ माना गया। हामदर्द नेशनल फाउंडेशन इंडिया ने इस बयान को मानहानिकारक और धार्मिक सौहार्द को नुकसान पहुँचाने वाला बताते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
कोर्ट ने बाबा रामदेव और पतंजलि से संबंधित सभी विवादास्पद वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का आदेश दिया। साथ ही, बाबा रामदेव से हलफनामा दाखिल करने को कहा गया, जिसमें वे भविष्य में ऐसे भड़काऊ या धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बयानों से बचने का आश्वासन दें। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले को हल्के में नहीं लिया जाएगा, खासकर तब जब इससे समाज में धार्मिक तनाव पैदा हो सकता है।
इस मामले में अगली सुनवाई 1 मई 2025 को निर्धारित की गई थी, जिसमें बाबा रामदेव ने हलफनामा दाखिल किया और भविष्य में ऐसे बयानों से बचने का आश्वासन दिया। कोर्ट ने इस पर संतोष व्यक्त करते हुए मामला बंद कर दिया।
यह घटना सोशल मीडिया और विज्ञापन अभियानों में भड़काऊ और धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण बयानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।



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