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post authorAdmin 03 Aug 2025

हरिद्वार में मनाया गया 115वां मुल्तान जोत महोत्सव, गंगा तट पर खेली गई दूध की होली.

हरिद्वार के हर की पैड़ी पर रविवार को 115वां मुल्तान जोत महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में श्रद्धालुओं ने गंगा में दूध की होली खेलकर भाईचारे और आस्था का अनोखा संदेश दिया। हर साल की तरह इस बार भी देश के कोने-कोने से श्रद्धालु महोत्सव में शामिल हुए, जिनमें पंजाब, दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के साथ-साथ पाकिस्तान के मुल्तान से आए श्रद्धालु भी मौजूद रहे।

महोत्सव की सबसे खास बात रही दूध की होली, जिसमें श्रद्धालु पिचकारियों के माध्यम से एक-दूसरे पर दूध और गंगाजल का छिड़काव करते नजर आए। “हर हर गंगे” और “जय मां गंगे” के जयघोषों से हर की पैड़ी का माहौल पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

अखिल भारतीय मुल्तान संगठन के अध्यक्ष महेंद्र नागपाल ने बताया कि इस परंपरा की शुरुआत वर्ष 1911 में पाकिस्तान के मुल्तान शहर से रूपचंद नामक एक भक्त द्वारा की गई थी। उन्होंने भाईचारे और शांति की कामना के लिए पैदल चलकर हर की पैड़ी तक आकर गंगा में जोत अर्पित की थी। तभी से यह परंपरा लगातार निभाई जा रही है।

इस वर्ष महोत्सव में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। दोपहर बाद से ही गंगा घाट पर श्रद्धालुओं का जुटान शुरू हो गया था। शाम को शोभायात्रा निकालकर मां गंगा को जोत अर्पित की गई। इस आयोजन को लेकर स्थानीय प्रशासन और तीर्थ पुरोहितों ने भी विशेष व्यवस्था की थी।

मुल्तान जोत महोत्सव अब सिर्फ एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक बन चुका है, जिसे ‘लघु भारत’ के रूप में देखा जा रहा है। आयोजकों ने इसे भावी पीढ़ियों तक पहुंचाने के संकल्प के साथ समापन किया।