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post authorAdmin 12 Aug 2025

उत्तरकाशी: बादलों के छंटने का इंतजार, धराली आपदा के कारणों को जानने में हो रही बाधा.

उत्तरकाशी के धराली-हर्षिल क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा के कारणों को समझने के लिए मौसम का साथ चाहिए। लगातार घने बादलों और कोहरे के कारण सेटेलाइट से भी उस प्रभावित क्षेत्र की सटीक तस्वीरें नहीं मिल पा रही हैं। इससे आपदा के वास्तविक कारणों की जांच प्रभावित हो रही है और विशेषज्ञ भी इस बात का इंतजार कर रहे हैं कि बादल छंटें और अंदर की स्थिति स्पष्ट हो।

एचएनबी गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगर्भ विभाग के विभागाध्यक्ष प्रोफेसर एमपीएस बिष्ट ने बताया कि धराली में मलबा और सैलाब जिस क्षेत्र से आया है, वहां की पूरी तस्वीर और आंकड़े अभी उपलब्ध नहीं हैं। सेटेलाइट भी उस क्षेत्र को घेरने वाले बादलों की वजह से सही चित्र नहीं दे पा रही है। मानसून के दौरान वहां घना कोहरा बना रहता है, जो जांच में बाधा बन रहा है।

प्रो. बिष्ट ने कहा कि जापान, फ्रांस, इंग्लैंड, अमेरिका जैसे देशों के साथ अनुबंध के तहत प्राकृतिक आपदाओं से जुड़े आंकड़ों का आदान-प्रदान होता है, लेकिन अभी तक किसी भी देश से इस आपदा से जुड़ा कोई डाटा साझा नहीं किया गया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि धराली में कोई ग्लेशियर झील भी नहीं थी, जो कभी अचानक फटने से आपदा का कारण बनती है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी नदी किनारे और स्थानीय लोगों के बयानों तक सीमित है। पहाड़ों के ऊपरी हिस्से, जहां घटना हुई है, वहां अभी तक कोई पहुंच नहीं पाया है और वहां के आंकड़े भी सामने नहीं आए हैं।

स्थानीय प्रशासन और वैज्ञानिक दोनों ही इस समय इंतजार कर रहे हैं कि बादल छंटें और साफ तस्वीरें मिलें ताकि धराली आपदा के पीछे के कारणों की सही जांच हो सके। तब ही इस आपदा की पूरी वास्तविकता सामने आ पाएगी और भविष्य के लिए प्रभावी सुरक्षा व तैयारी की रणनीति बनाई जा सकेगी।