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post authorAdmin 06 Sep 2025

7 सितंबर को उत्तराखंड में चंद्रग्रहण और पितृ पक्ष की शुरुआत, मंदिरों में रहेगा सूतक काल.

उत्तराखंड में रविवार, 7 सितंबर 2025 का दिन धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व रखने वाला होगा। इस दिन साल का दूसरा पूर्ण चंद्रग्रहण लगेगा और इसी के साथ कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर पितृ पक्ष की शुरुआत भी होगी। दोनों ही कारणों से पूरे राज्य में आस्था और सावधानी का वातावरण रहेगा।

विद्वानों के अनुसार, ग्रहण का सूतक काल ग्रहण से लगभग नौ घंटे पहले शुरू हो जाता है। इस लिहाज से रविवार दोपहर 12:57 बजे से सूतक काल लागू हो जाएगा, जो ग्रहण समाप्त होने तक जारी रहेगा। इस दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और देवी-देवताओं की मूर्तियों को स्पर्श करने से बचने की सलाह दी गई है। पूजा-पाठ, मांगलिक कार्य और किसी भी धार्मिक अनुष्ठान को भी स्थगित करना होगा।

ग्रहण का समय
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि यह पूर्ण चंद्रग्रहण रात 9:57 बजे शुरू होकर रात 1:26 बजे तक रहेगा। भारत में इसे प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकेगा, इसलिए सूतक काल मान्य होगा। उत्तराखंड विद्वत सभा के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र प्रसाद ममगाईं ने कहा कि इस दौरान तुलसी के पत्ते तोड़ने जैसी गतिविधियों से भी परहेज करना चाहिए।

सावधानियां
धार्मिक परंपराओं के अनुसार, सूतक काल गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष रूप से संवेदनशील माना जाता है। इसलिए उन्हें अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। घरों में भी पूजा-पाठ और दान जैसे कार्यों को ग्रहण समाप्ति तक टालने की परंपरा है।

पितृ पक्ष की शुरुआत
इसी दिन से पितृ पक्ष का आरंभ होगा, जो 16 दिनों तक चलता है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति और आशीर्वाद के लिए तर्पण, पिंडदान, श्राद्ध और दान का विशेष महत्व है। विद्वानों का मानना है कि इस काल में श्रद्धा और नियमों के साथ किए गए कर्म परिवार की समृद्धि और पितरों की कृपा लाते हैं।

निष्कर्ष
कुल मिलाकर, रविवार का दिन उत्तराखंड में धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण रहेगा। चंद्रग्रहण और पितृ पक्ष का संगम लोगों को न केवल आस्था बल्कि सावधानी का भी संदेश देता है। शास्त्रों के अनुसार, नियमों का पालन करने से जीवन में शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।