ऋषिकेश के होनहार संगीत विद्यार्थी समर त्रिपाठी ने केकेएचडी (कलर्स के हुनर दी) सीजन 11 के ग्रैंड फिनाले में शानदार जीत हासिल की है। पंजाब के संगरूर रोड स्थित प्रिंस विला में आयोजित इस प्रतिष्ठित संगीत प्रतियोगिता में समर ने ग़ज़ल गायन में अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्होंने प्रसिद्ध ग़ज़ल “चुपके चुपके रात दिन आंसू बहाना याद है” की ऐसी भावपूर्ण प्रस्तुति दी कि श्रोताओं समेत निर्णायक मंडल भी उनकी प्रतिभा से अभिभूत हो गया।
समर त्रिपाठी ऋषिकेश निवासी हैं और राहुल त्रिपाठी के पुत्र हैं। वे एनडीएस ऋषिकेश, सरगम शिक्षा कला केन्द्र हरिद्वार और श्री बद्रीनारायण सुर संगीत कला केन्द्र से संगीत की विधिवत शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस संगीतमयी यात्रा में उनके गुरु पंडित देवेंद्र कौशिक का मार्गदर्शन निर्णायक साबित हुआ।
प्रतियोगिता के पहले चरण का ऑडिशन ऋषिकेश पब्लिक स्कूल में हुआ था, जहाँ समर ने “हे री सखि मंगल गाओ री” गीत से अपनी सशक्त शुरुआत की। दूसरे राउंड में मुनि की रेती स्थित स्वामी दयानंद सरस्वती एससीपी इंटर कॉलेज में “ओ रे ताल मिले नदी के जल में” गीत प्रस्तुत कर सबका ध्यान आकर्षित किया।
क्वार्टर फिनाले (टीवी राउंड) देहरादून के कन्या गुरुकुल महाविद्यालय, राजपुर रोड में आयोजित हुआ, जिसमें समर ने “सांसों की माला पे सिमरूं मैं पी का नाम” गीत से सभी का दिल जीत लिया। इसके बाद सेमीफिनाले में माया देवी यूनिवर्सिटी, सेलाकुई में “ये दौलत भी ले लो, ये शोहरत भी ले लो” जैसी क्लासिक ग़ज़ल से समर ने माहौल को भावनात्मक बना दिया।
ग्रैंड फिनाले में उनकी प्रस्तुति निर्णायक रही और उन्हें विजेता घोषित किया गया। समर की यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे उत्तराखंड के लिए गर्व का विषय है। प्रतियोगिता से लौटने के बाद समर ने अपने गुरु पंडित देवेंद्र कौशिक से आशीर्वाद लेकर इस सफलता को उन्हें समर्पित किया।



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