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post authorAdmin 08 Jul 2025

उत्तराखंड में बाघ के हमले बढ़े, 10 साल में 68 मौतें, वन विभाग ने तेज किए रेस्क्यू ऑपरेशन.

उत्तराखंड में तेंदुओं की तुलना में अब बाघ के हमलों में ज्यादा जानें जा रही हैं। वन विभाग के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2024 के पहले छह महीनों में बाघों के हमले में 10 लोगों की मौत हुई, जबकि तेंदुए के हमलों में छह लोगों ने जान गंवाई। यह बदलता हुआ ट्रेंड वन्यजीव-मानव संघर्ष की नई चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।

वर्ष 2014 से 2024 के बीच बाघों के हमले में 68 लोगों की मौत और 83 घायल हुए। वहीं तेंदुओं के हमलों में 214 मौतें और 1006 लोग घायल हुए। 2024 में जनवरी से जून तक कुल 25 लोगों की मौत और 136 लोग घायल हुए हैं, जिनमें बाघों के हमले ज्यादा जानलेवा साबित हुए।

वन विभाग ने मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन तेज कर दिए हैं। 1 जनवरी 2024 से 30 जून 2025 तक आठ बाघों को पकड़ा गया, जिनमें से सात को रेस्क्यू सेंटर भेजा गया। इसी अवधि में 44 तेंदुओं को रेस्क्यू किया गया, जिनमें 19 को सेंटर भेजा गया है।

इस दौरान तेंदुओं को पकड़ने, ट्रैंक्यूलाइज करने और उपचार के लिए 124 अनुमतियां दी गईं। अपरिहार्य परिस्थितियों में मारने की भी पांच अनुमतियां जारी की गईं। वन विभाग ने संवेदनशील क्षेत्रों में क्यूआरटी टीमें तैनात की हैं और लोगों को जागरूक करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।