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post authorAdmin 17 Jul 2025

उत्तराखंड पंचायत चुनाव: युवाओं की नई राजनीतिक दस्तक, छात्र नेताओं ने संभाली मोर्चा.

उत्तराखंड में हो रहे त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव इस बार एक बदली हुई तस्वीर सामने ला रहे हैं। लंबे समय से बुजुर्गों की भागीदारी और दबदबे से पहचाने जाने वाले इन चुनावों में अब युवाओं की भागीदारी ने नई ऊर्जा भर दी है। खास बात यह है कि इन युवा चेहरों में अधिकांश छात्र राजनीति की पृष्ठभूमि से हैं, जो अब गांवों की बागडोर संभालने को तैयार हैं।

राज्यभर में छात्रसंघ से निकले युवा प्रत्याशी पंचायत चुनावों में भाग ले रहे हैं। डीएवी कॉलेज देहरादून के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष सिद्धार्थ राणा रौंदेली क्षेत्र पंचायत से चुनाव लड़ रहे हैं। उनका कहना है कि छात्र राजनीति से मिला अनुभव अब वह गांव की समस्याओं के समाधान में लगाना चाहते हैं।

पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष प्रेमचंद नौटियाल मशक क्षेत्र से बीडीसी पद के लिए मैदान में हैं। वे मानते हैं कि गांवों में अब युवाओं की सोच के मुताबिक बदलाव की जरूरत है और यह परिवर्तन वही ला सकते हैं जो जमीनी हकीकत को समझते हैं।

इसी तरह, एनएसयूआई से जुड़े श्याम सिंह चौहान रायगी से जिला पंचायत सदस्य पद पर ताल ठोक रहे हैं। छात्र नेता प्रमेश रावत प्यूनल क्षेत्र पंचायत से बीडीसी प्रत्याशी हैं, वहीं वरिष्ठ छात्र नेता अंकिता पाल ग्राम सभा खोलिया से ग्राम प्रधान पद के लिए चुनाव मैदान में हैं। बुढ़वां क्षेत्र से नित्यानंद कोठियाल भी बीडीसी के लिए किस्मत आजमा रहे हैं।

इन युवाओं का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल चुनाव जीतना नहीं, बल्कि अपने क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, महिला कल्याण और बुजुर्गों की पेंशन जैसी योजनाओं को मजबूती से लागू करना है।

इन युवाओं की राजनीतिक यात्रा गांवों की प्राथमिक समस्याओं को हल करने से शुरू होकर एक नई विकास गाथा लिखने की ओर बढ़ रही है। यह बदलाव इस बात का संकेत है कि अब उत्तराखंड की पंचायतों में भी युवाओं की सोच और नेतृत्व आने वाले समय को नई दिशा देंगे।