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post authorAdmin 12 Sep 2025

सीपी राधाकृष्णन बने देश के नए उपराष्ट्रपति, 152 वोटों के अंतर से दर्ज की जीत.

देश को नया उपराष्ट्रपति मिल गया है। 67 वर्षीय वरिष्ठ भाजपा नेता सीपी राधाकृष्णन ने शुक्रवार को राष्ट्रपति भवन में आयोजित भव्य समारोह में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें शपथ दिलाई। इस मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ समेत कई वरिष्ठ नेता और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। समारोह में भारतीय लोकतंत्र की गरिमा और परंपरा का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

राधाकृष्णन ने विपक्षी इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार और पूर्व जस्टिस बी. सुदर्शन रेड्डी को हराकर यह जीत हासिल की। इस चुनाव में उन्हें कुल 452 वोट मिले जबकि रेड्डी को 300 वोट प्राप्त हुए। 152 मतों के अंतर से उनकी जीत भाजपा के संगठनात्मक कौशल और राधाकृष्णन की व्यक्तिगत स्वीकार्यता को दर्शाती है। यह चुनाव इसलिए आवश्यक हुआ क्योंकि पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने स्वास्थ्य कारणों से अपना कार्यकाल पूरा होने से पहले इस्तीफा दे दिया था।

शपथ लेने से पहले राधाकृष्णन ने महाराष्ट्र के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिया। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी सूचना के मुताबिक, अब गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत को महाराष्ट्र का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है।

राधाकृष्णन का राजनीतिक सफर बेहद प्रेरणादायी रहा है। 16 वर्ष की उम्र में वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और जनसंघ से जुड़े और धीरे-धीरे भाजपा की राजनीति में सक्रिय हुए। उन्होंने 1998 और 1999 में कोयंबटूर से लोकसभा चुनाव जीता और संसद में अपनी सक्रिय उपस्थिति दर्ज कराई। 2004 से 2007 तक वे तमिलनाडु भाजपा के अध्यक्ष रहे। इस दौरान उन्होंने 93 दिनों में 19,000 किलोमीटर लंबी रथ यात्रा कर संगठन को नई ऊर्जा दी। यात्रा का उद्देश्य नदियों को जोड़ना, आतंकवाद उन्मूलन, समान नागरिक संहिता और नशे के खिलाफ अभियान जैसे अहम मुद्दे थे।

इसके अलावा, 2020 से 2022 तक उन्होंने केरल भाजपा के प्रभारी के रूप में भी अहम भूमिका निभाई। संगठन और प्रशासन दोनों पर उनकी मजबूत पकड़ उन्हें भाजपा नेतृत्व का भरोसेमंद चेहरा बनाती है। उनकी विनम्रता, सादगी और कार्यकुशलता ने उन्हें जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच लोकप्रिय बनाया।

समर्थक उन्हें “तमिलनाडु का मोदी” कहकर पुकारते हैं। आज उनका उपराष्ट्रपति बनना न केवल भाजपा बल्कि पूरे देश के लिए गर्व का क्षण है। उम्मीद की जा रही है कि उनके अनुभव और संगठनात्मक क्षमता से भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं को नई दिशा मिलेगी।