अगले सप्ताह सोने की कीमतों में कुछ हद तक स्वस्थ गिरावट देखने को मिल सकती है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हालिया रिकॉर्ड तेजी अब भी जारी है, लेकिन त्योहारों के बाद फिजिकल डिमांड कम हो गई है। एक्सपर्ट्स ने यह राय जाहिर की।
वैश्विक और घरेलू बाजारों में नई ऊंचाइयों को छूने के बाद सर्राफा एक सीमित दायरे में कारोबार कर सकता है, क्योंकि निवेशकों की नजर अमेरिकी वित्त पोषण विधेयक, प्रमुख वैश्विक आंकड़ों और फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों पर है।
क्या हैं एक्सपर्ट्स के विचार
जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के कमोडिटी एंड करेंसी रिसर्च के वाइस प्रेसीडेंट प्रणव मेर ने कहा, "सोने की कीमतों में कुछ स्वस्थ गिरावट देखने को मिल सकता है, क्योंकि मौजूदा बुनियादी बातों का पहले ही मूल्यांकन हो चुका है और सप्ताह के मध्य के बाद भौतिक मांग कम हो जाएगी।" उन्होंने आगे कहा कि कारोबारी प्रमुख वैश्विक संकेतकों पर नजर रखेंगे, जिनमें चीन के आंकड़े, ब्रिटेन की मुद्रास्फीति, विभिन्न क्षेत्रों के पीएमआई आंकड़े, अमेरिकी उपभोक्ता विश्वास के आंकड़े और फेडरल रिजर्व की टिप्पणी शामिल हैं।
बीते हफ्ते सोने में दिखी थी तेजी
मेर ने आगे कहा कि भारत में त्योहारी मांग और ईटीएफ की मजबूत खरीदारी के कारण पिछले सप्ताह सोना सकारात्मक रुख के साथ बंद हुआ। पिछले सप्ताह मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर सोने का वायदा भाव 5,644 रुपये या 4.65 प्रतिशत बढ़ा।
एंजल वन के प्रथमेश माल्या ने कहा कि सोने की कीमतों में तेजी रुकने का नाम नहीं ले रही है। नीतिगत अनिश्चितता, अमेरिकी शुल्क और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में सुस्ती के कारण 2025 तक इसमें तेजी बनी रहेगी।
एमसीएक्स पर, दिसंबर डिलिवरी वाले सोने का वायदा भाव शुक्रवार को 1,32,294 रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। हालांकि, इसमें ऊपरी स्तर से गिरावट हुई और यह 1,27,008 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ



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