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post authorAdmin 24 Oct 2025

जलसखी योजना : उत्तराखंड की महिलाओं को मिलेगा रोजगार, लखपति दीदी के बाद अब यह स्कीम बनाएगी मालामाल...!.

उत्तराखंड सरकार ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए 'जलसखी' योजना के तहत पेयजल आपूर्ति और बिलिंग का काम महिला स्वयं सहायता समूहों को सौंपा जाएगा।

 

उत्तराखंड सरकार ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए कई तरह की कल्याणकारी योजनाएं चला रही है। लखपति दीदी योजना से पहले ही राज्य की 1.63 लाख महिलाओं की वार्षिक कमाई 1 लाख रुपये से ज्यादा हो गई है। अब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने एक नई योजना को लॉन्च करने का फैसला कर लिया है। 'जलसखी' योजना के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और बिलिंग का काम महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG) को सौंपा जाएगा।

'हर घर नल' योजना के पूरा होने के बाद, पेयजल विभाग अब महिलाओं को पानी से जुड़े कामों में शामिल करने की तैयारी कर रहा है। इस योजना के तहत महिलाओं को पानी के बिल बांटने, किसी तरह की समस्या को सुधारने जैसे काम दिए जाएंगे। उत्तराखंड सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। इसी कड़ी में, सरकार ने 'जलसखी', 'लखपति दीदी' और 'मुख्यमंत्री सशक्त बहना उत्सव योजना' जैसी कई योजनाएं शुरू की हैं। इन योजनाओं

का उद्देश्य महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाना और उन्हें रोजगार के अवसर प्रदान करना है।

 

 

'जलसखी योजना' एक सरकारी पहल है जिसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को रोज़गार के अवसर प्रदान करके उन्हें सशक्त बनाना है, साथ ही साथ 'हर घर जल' मिशन को भी बढ़ावा देना है। यह योजना उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में संचालित है, जहाँ महिला स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) की सदस्यों को "जलसखी" के रूप में नियुक्त किया जाता है। 

मुख्य उद्देश्य

  • महिला सशक्तिकरण: ग्रामीण महिलाओं को पेयजल आपूर्ति के प्रबंधन का काम सौंपकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाना।
  • रोज़गार के अवसर: महिलाओं को स्थायी रोज़गार देना, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो।
  • पानी की उपलब्धता: 'हर घर जल' मिशन के तहत हर घर तक सुरक्षित और पर्याप्त मात्रा में पीने का पानी पहुँचाना।
  • जल संरक्षण: जल के महत्व और उसके संरक्षण के बारे में ग्रामीण समुदायों में जागरूकता फैलाना। 

जलसखी के प्रमुख कार्य
जलसखी के कार्यों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां शामिल होती हैं, जो इस प्रकार हैं: 

  • पानी के बिल जमा करना: घरों से पानी के उपयोग का बिल एकत्र करना और उसकी रसीद देना।
  • नए कनेक्शन देना: ग्रामीणों को नए पानी के कनेक्शन के लिए आवेदन करने में मदद करना।
  • जलापूर्ति की निगरानी: अपने आवंटित क्षेत्र में पानी की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करना।
  • रखरखाव का काम: पानी की खराब टोंटियों और पाइपलाइनों की मरम्मत से संबंधित जानकारी देना।
  • पानी की गुणवत्ता की जाँच: पीने के पानी की गुणवत्ता की जाँच करना।
  • जागरूकता फैलाना: जल संरक्षण और स्वच्छता के महत्व के बारे में गाँव के लोगों को जागरूक करना। 

पात्रता
योजना के लिए योग्य होने के लिए, महिला उम्मीदवारों को आमतौर पर 10वीं या 12वीं कक्षा उत्तीर्ण होना चाहिए। उन्हें ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत गठित महिला स्वयं सहायता समूहों से चुना जाता है। 

वेतन और लाभ
जलसखी को उनके काम के बदले हर महीने मानदेय दिया जाता है। कुछ राज्यों में उन्हें बिल संग्रह की गई राशि का कुछ प्रतिशत हिस्सा भी दिया जाता है। यह योजना ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक स्थिति को सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।