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post authorAdmin 21 Nov 2025

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद ने बोर्ड परीक्षा में किया फैसला”-“20 % उच्च-कोटि थिंकिंग कौशल वाले सवालों का धमाकेदार बदलाव.

उत्तराखंड बोर्ड ने इस साल हाई-स्कूल (कक्षा 10) और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) के सभी विषयों के प्रश्नपत्रों में एक बड़ा बदलाव किया है। इस बदलाव के अनुसार अब प्रत्येक विषय के प्रश्नपत्र में लगभग 20 % प्रश्न “उच्च-कोटि थिंकिंग कौशल” यानी हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल (HOTS) के होंगे।

बदलाव का विवरण

शिक्षा परिषद के अनुसार, इस वर्ष से प्रश्नपत्रों में HOTS वाले सवालों को शामिल करना इसलिए ज़रूरी था ताकि विद्यार्थी सिर्फ रटने या याद करने की बजाय समझकर, विश्लेषण करके और रचनात्मक ढंग से जवाब दें। इस पहल से परीक्षा-दाताओं की असली क्षमता का आकलन संभव होगा।


विशेष रूप से, बोर्ड ने निर्णय लिया है कि हाई-स्कूल और इंटरमीडिएट के हर विषय में यह 20 % का अनुपात लागू होगा। उदाहरण के लिए यदि किसी विषय में कुल 100 प्रश्न हों, तो लगभग 20 प्रश्न ऐसे होंगे जिनमें विद्यार्थी को केवल “उत्तर याद करना” नहीं बस, बल्कि “सोचना”, “तुलना करना”, “निर्माण करना” होगा।

HOTS क्या है?


“HOTS” अर्थात हाई ऑर्डर थिंकिंग स्किल — यह उन कौशलों को परखने का तरीका है जो सिर्फ जानकारी याद करने से आगे जाते हैं। इसमें शामिल हैं:

  • विश्लेषण (Analysis)

  • मूल्यांकन (Evaluation)

  • निर्माण-सृजन (Creation)

  • इस तरह के प्रश्न विद्यार्थी को प्रेरित करते हैं कि वे सीखी जानकारी को सक्रिय रूप से प्रयोग करें, समस्याओं का हल निकालें, विचारों के बीच संबंध जोड़ें, तथा नई जानकारी को नए संदर्भ में लागू करें।

आगे का लाभ व प्रभाव

इस पहल का उद्देश्य सिर्फ बोर्ड परीक्षा तक सीमित नहीं है — बल्कि आने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं और उच्चतर शिक्षा के लिए भी छात्रों को तैयार करना है। HOTS-आधारित प्रश्नों से विद्यार्थी “रटने” की बजाय समझने और सोचने की आदत विकसित करेंगे, जो आगे जटिलात्मक पाठ्यक्रमों और प्रतियोगी परीक्षा पैटर्न में बेहद उपयोगी होगा।


वहीं, बोर्ड अधिकारी यह भी मानते हैं कि इससे शिक्षक-पाठ्यक्रम डिजाइन और अध्यापन पद्धति में बदलाव आएँगे — शिक्षण सिर्फ पाठ याद करवाना नहीं होगा, बल्कि सोच-विचार व समस्या-समाधान केंद्रित बन जाएगा।

निष्कर्ष 
इस प्रकार, उत्तराखंड बोर्ड का यह कदम शिक्षा प्रणाली में एक सकारात्मक दिशा में परिवर्तन है। HOTS-प्रश्न शामिल होने से न सिर्फ परीक्षार्थियों की वास्तविक क्षमताओं का परीक्षण होगा, बल्कि शिक्षा-दृष्टि से अधिक गुणवत्ता-मूलक और सोच-उन्मुख बनी रहेगी। इसलिए छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों के लिए यह समय बदलाव को समझने व उसी के अनुरूप तैयारी करने का है।