घटना का सिलसिला
सोशल मीडिया पर 17 नवंबर को एक वीडियो तेजी से वायरल हुआ, जिसमें भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को यह कहते हुए दिखाया गया था कि “मुसलमानों की तुलना में हिंदू ISIS की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं”।
इसके तुरंत बाद डोभाल ने पूर्ण खंडन किया कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया है।
डीपफेक की चेतावनी और सुरक्षा आशंका
डोभाल ने मीडिया को बताया कि यह वीडियो डीपफेक-हेरफेर का मामला प्रतीत होता है — यानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) या उन्नत तकनीक से शब्द-वाक्य को बदलकर तथा आवाज-छवि को मिलाकर तैयार किया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के वीडियो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और सार्वजनिक विश्वास को भромित करने, नीतिगत बहस को विकृत करने तथा अलगाव-भाव को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए जा सकते हैं।
क्या वीडियो में दिखाया गया था?
वीडियो में ऐसा दिखाया गया कि विदेशी खुफिया-एजेंसियों द्वारा भारत में हिंदुओं की भर्ती मुसलमानों की तुलना में अधिक की जाती है। इस क्लिप पर डोभाल ने कहा कि उन्होंने इस तरह का कोई बयान कभी नहीं दिया।
क्यों यह महत्वपूर्ण है?
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विश्वास एवं सामाजिक सामंजस्य के लिए खतरा
इस तरह के डीपफेक वीडियो से जनता का भरोसा कमजोर हो सकता है — विशेषकर जब यह सुरक्षा-संस्था द्वारा दिए गए बयान का रूप लेता है। -
नीति एवं सुरक्षा दृष्टिकोण से असर
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डोभाल ने कहा कि भारत की आतंकवाद-रोधी नीति यह मानती रही है कि ISIS भर्ती सीमित है और्ट्रांसनेशनल प्रचार प्रभाव अधिक है बनाम घरेलू कट्टरपंथ। इस तरह का वीडियो इस स्थिरता को चुनौती दे सकता था।
निष्कर्ष
यह स्पष्ट है कि वायरल वीडियो में दिखाया गया कथन परम्परागत रूप से सत्य नहीं है — इसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर उद्देश्यपूर्ण हमला माना जा सकता है। डोभाल द्वारा जारी बयान ने इस तरह के सूचना-अभियानों से सावधान रहने का संदेश दिया है।



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