देहरादून में 80 वर्षीय अनिवासी भारतीय (एनआरआई) महिला की पैतृक भूमि हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। मामला तब उजागर हुआ जब महिला ने अपनी जमीन पर अवैध निर्माण कार्य होते देखा और जांच में बड़े पैमाने पर जालसाजी का खुलासा हुआ।
घटना का खुलासा: जमीन पर अवैध निर्माण देख कर चौंकी पीड़िता
न्यूयॉर्क में रहने वाली और वर्तमान में दक्षिण दिल्ली के महारानी बाग में निवासरत नीलम मिसाल जब देहरादून लौटीं, तो उन्होंने पाया कि भारूवाला ग्रांट स्थित उनकी करीब छह बीघा (लगभग 5,400 वर्ग गज) पैतृक जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है।
जमीन पर बने मकान, नींव और सीमांकित प्लॉट देखकर वह हैरान रह गईं। पड़ताल में सामने आया कि जमीन को अवैध रूप से भूखंडों में बदलकर करोड़ों रुपये में बेचा जा चुका है।
जाली दस्तावेज़ों के सहारे जमीन बेची गई
पीड़िता की ओर से नियुक्त प्रतिनिधि, सहारनपुर निवासी जीशान ने बताया कि मिसाल अपनी भूमि की स्थिति देखकर स्तब्ध रह गईं। उन्होंने कहा: “मुझे अपनी आंखों पर यकीन नहीं हुआ। मेरा पुश्तैनी घर गायब था और उसकी जगह अवैध निर्माण हो चुका था। यह सिर्फ चोरी नहीं है, बल्कि मेरी विरासत पर एक संगठित हमला है।”
सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में रिकॉर्ड की जांच में पता चला कि जमीन को हड़पने के लिए फर्जी बिक्री पत्र, जाली हस्ताक्षर और अन्य दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया था।एफआईआर दर्ज—27 आरोपी नामजद
मामले के सामने आने के बाद नीलम मिसाल ने क्लेमेनटाउन थाना में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने धोखाधड़ी, जालसाजी, साजिश और अवैध कब्जे की गंभीर धाराओं में 27 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
थाना प्रभारी (एसएचओ) मोहन सिंह ने एफआईआर की पुष्टि करते हुए कहा:“शिकायत में 27 लोगों के नाम हैं, जिनमें शेख साद उल्लाह, इरफान हैदर, नदीम खान, शेख फारुख उल्लाह और इमरान फरीदी शामिल हैं। मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है।”
संगठित भू-माफिया गिरोह पर शक
प्रारंभिक जांच में पुलिस को संकेत मिले हैं कि यह घटना देहरादून व आसपास के इलाकों में सक्रिय एक संगठित भू-माफिया नेटवर्क का हिस्सा है। यह गिरोह उन लोगों की संपत्तियों को निशाना बनाता है जो लंबे समय से राज्य में मौजूद नहीं होते, खासकर विदेशों में रहने वाले एनआरआई।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया:
“जालसाजी की जटिलता यह दर्शाती है कि इसमें एक सुचिंतित और संगठित आपराधिक गिरोह शामिल है। हम प्लॉट बिक्री से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच कर रहे हैं और संभव है कि इसमें और भी लोग शामिल हों।”



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