पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट का निधन, हरिद्वार में शोक की लहर
उत्तराखंड राज्य आंदोलन के प्रखर नेता और उक्रांद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष दिवाकर भट्ट का मंगलवार शाम निधन हो गया। 79 वर्षीय भट्ट लंबे समय से अस्वस्थ चल रहे थे और उन्हें लगातार पांच बार ब्रेन स्ट्रोक आया था। निधन से कुछ घंटे पहले उन्हें देहरादून के निजी अस्पताल से उनके हरिद्वार स्थित निवास शिवालोक कॉलोनी वापस लाया गया था। शाम करीब 4 बजे उनके निधन की सूचना पर पूरे राज्य में शोक फैल गया।
राजकीय सम्मान के साथ अंतिम यात्रा, सरकारी कार्यालय बंद
आज (बुधवार) दिवाकर भट्ट का अंतिम संस्कार हरिद्वार स्थित खड़खड़ी श्मशान घाट पर राजकीय सम्मान के साथ किया जाएगा।
उनकी अंत्येष्टि को देखते हुए हरिद्वार के सभी सरकारी कार्यालय आज बंद रखे गए हैं।
सुबह से ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, पार्टी कार्यकर्ता और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग उनके आवास पर अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
राजनीतिक दलों और राज्य आंदोलनकारियों ने जताया दुख
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नगर विधायक मदन कौशिक, तथा यूकेडी के विभिन्न पदाधिकारी उनके आवास पहुंचे और परिवार को सांत्वना दी।
राजनीतिक दलों ने दिवाकर भट्ट के निधन को उत्तराखंड की राजनीति और राज्य आंदोलन इतिहास की अपूर्णीय क्षति बताया।
जन्म, संघर्ष और योगदान
दिवाकर भट्ट का जन्म 1 अगस्त 1946 को टिहरी गढ़वाल जिले के सुपार गांव (पट्टी बडियारगढ़) में हुआ था।
राज्य आंदोलन के दौरान वे सबसे आक्रामक, मुखर और जनहित के मुद्दों को निर्भीकता से उठाने वाले चेहरों में गिने जाते थे।
हरिद्वार में वे लंबे समय से निवास कर रहे थे और यही स्थान उनका कर्मस्थल भी रहा।
परिवार में शोक, अंतिम यात्रा की तैयारियाँ पूरी
भट्ट परिवार में उनके पुत्र ललित भट्ट, बहू, पौत्र और पौत्री हैं।
जिलाधिकारी मयूर दीक्षित ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुसार दिवाकर भट्ट के पार्थिव शरीर को पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ खड़खड़ी श्मशान घाट ले जाया जाएगा।



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