भारत लगातार रूस से तेल खरीद रहा है। सिर्फ क्रूड ऑयल ही नहीं, बल्कि खाद्य तेल भी बड़ी मात्रा में खरीदा जा रहा है।
भले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप बार-बार यह कहते रहे हों कि भारत रूस से तेल खरीदना कम कर रहा है, लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है। भारत रूस से न सिर्फ क्रूड ऑयल खरीद रहा है, बल्कि खाद्य तेल की भी जमकर खरीदारी हो रही है। पिछले चार वर्षों में भारत का रूस से सूरजमुखी तेल का आयात 12 गुना बढ़ गया है। इससे रूस अब भारत का सबसे बड़ा सूरजमुखी तेल सप्लायर बन गया है और उसने यूक्रेन को पीछे छोड़ दिया है।
रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से यूक्रेन का अधिकांश सूरजमुखी तेल यूरोप की ओर भेजा जा रहा है, जबकि रूस की समुद्री बंदरगाहों तक आसान और सुनिश्चित पहुंच ने उसे भारत के लिए अधिक भरोसेमंद सप्लायर बना दिया है। इंडस्ट्री से जुड़े लोगों का कहना है कि हाल ही में रूस और भारत के उद्योग प्रतिनिधियों ने एक-दूसरे के देशों का दौरा किया है, ताकि सप्लाई चेन को और मजबूत किया जा सके।
भारत में है सूरजमुखी तेल की बड़ी खपत
सूरजमुखी तेल भारत में सबसे अधिक उपयोग किए जाने वाले तीन खाद्य तेलों में से एक है। देश में खपत होने वाले सूरजमुखी तेल का 5% से भी कम हिस्सा घरेलू उत्पादन से आता है। रूस दुनिया में सूरजमुखी तेल का सबसे बड़ा और सबसे भरोसेमंद सोर्स है। भारत को इस सप्लाई चेन की विश्वसनीयता का लाभ मिलता है।
रूस की हिस्सेदारी में भारी वृद्धि
भारत के कुल सूरजमुखी तेल आयात में रूस की हिस्सेदारी 2021 में लगभग 10% थी, जो 2024 में बढ़कर 56% हो गई। भारत ने 2024 कैलेंडर वर्ष में रूस से 20.9 लाख टन सूरजमुखी तेल आयात किया, जो 2021 के लगभग 1.75 लाख टन की तुलना में 12 गुना अधिक है।
क्या रूस का तेल सस्ता पड़ता है?
युद्ध से पहले, यूक्रेन भारत का सबसे बड़ा सूरजमुखी तेल सप्लायर था। लेकिन जब से रूस ने काला सागर (Black Sea) के समुद्री बंदरगाहों को अवरुद्ध कर दिया, यूक्रेन को अपना उत्पादन सड़क और रेल मार्गों से यूरोपीय देशों को भेजना पड़ा, जिससे परिवहन लागत काफी बढ़ गई। युद्ध से पहले, यूक्रेन अपनी लगभग 90% कृषि उपज समुद्री बंदरगाहों से निर्यात करता था। दूसरी तरफ रूस के पास सूरजमुखी की और भी बड़ी फसल थी, लेकिन वह यूरोप को बेच नहीं पा रहा था। ऐसे में रूस हमें कॉम्पिटिटिव रेट्स पर तेल दे रहा है।
भारत की तेल निर्भरता
भारत अपनी कुल खाद्य तेल की मांग का लगभग 60% आयात के माध्यम से पूरा करता है। कुल उपभोग में पाम ऑयल का हिस्सा लगभग 50% है, जबकि सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। 1990 के दशक में भारतीय किसानों ने सूरजमुखी की बुवाई कम कर दी थी, क्योंकि सस्ते आयातित खाद्य तेलों की बढ़ोतरी से यह फसल लाभदायक नहीं रही। हाल के वर्षों में सूरजमुखी तेल का आयात इसलिए तेजी से बढ़ा, क्योंकि 2023 और 2024 में यह पहली बार पाम ऑयल से सस्ता हो गया था। हालांकि, इस साल कीमतों में इजाफा हुआ है।



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