चमोली: बर्फबारी के बाद हिमस्खलन से संभावित खतरे को देखते हुए विष्णुप्रयाग जल विद्युत परियोजना की निर्मात्री जेपी कंपनी ने अलकनंदा नदी के उद्गम से लेकर परियोजना के बैराज तक सीसीटीवी कैमरों से नियमित निगरानी का निर्णय लिया है। कंपनी ने ग्लेशियर प्वाइंट के समीप कैमरे लगाने का काम शुरू कर दिया है।
कंपनी की ओर से लगाए जा रहे ये कैमरे सैटेलाइट के माध्यम से संचालित होंगे, जिससे बर्फबारी के बाद हिमस्खलन की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा सकेगी। इसका उद्देश्य रैणी आपदा जैसी किसी भी त्रासदी की पुनरावृत्ति को रोकना है।
जेपी कंपनी ने माणा घाटी, बसुधारा, हनुमानचट्टी, खीरेां नदी क्षेत्र और घस्तोली के आसपास कैमरे लगाने की योजना बनाई है। कुछ स्थानों पर स्थापना का कार्य शुरू हो चुका है।
ज्योतिर्मठ के एसडीएम चंद्रशेखर वशिष्ठ ने बताया कि अलकनंदा के उद्गम से परियोजना बैराज तक संवेदनशील स्थलों पर कैमरे लगाए जा रहे हैं। इससे परियोजना कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ संभावित नुकसान को कम किया जा सकेगा।
गौरतलब है कि 7 फरवरी 2021 को चमोली जिले की नीती घाटी में हुए भीषण हिमस्खलन से ऋषिगंगा जल विद्युत परियोजना पूरी तरह नष्ट हो गई थी और विष्णुगाड-तपोवन परियोजना को भारी क्षति पहुंची थी। इस आपदा में 200 से अधिक लोगों की जान गई थी, जिसकी याद आज भी स्थानीय लोगों के मन में ताजा है।



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