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post authorAdmin 02 Jan 2026

हिमालय की पुकार सुनकर स्पेन से आई जेमा: पीठ पर ढो रहीं पहाड़ों का कचरा, बचाने में जुटीं देवभूमि की आत्मा.

चमोली।
हिमालय केवल पहाड़ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की धरोहर है। इसी धरोहर को बचाने के लिए स्पेन से आईं जेमा कोलेल आज उत्तराखंड के दुर्गम हिमालयी इलाकों में अपनी पीठ पर कचरा ढोती नजर आती हैं।

ग्राफिक डिजाइनर पेशे से जुड़ी 30 वर्षीय जेमा वर्ष 2023 में योग सीखने और पहाड़ों की शांति को महसूस करने उत्तराखंड आई थीं। ऋषिकेश में योग अभ्यास के बाद जब वह चमोली जिले के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पहुंचीं, तो वहां फैले प्लास्टिक कचरे ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया। उसी क्षण उन्होंने तय कर लिया कि वह सिर्फ घूमने नहीं, बल्कि हिमालय को साफ करने का संकल्प लेकर यहां रहेंगी।

लोहाजंग निवासी पर्वतारोही मनोज राणा के साथ मिलकर जेमा ने हिमालयी क्षेत्रों में सफाई अभियान शुरू किया। बीते दो वर्षों में वे उच्च हिमालय से 300 किलो से अधिक प्लास्टिक कचरा अपनी पीठ पर ढोकर सड़क तक ला चुकी हैं।

जेमा का कहना है कि यदि समय रहते हिमालय को बचाने की कोशिश नहीं की गई, तो आने वाली पीढ़ियां इसे केवल तस्वीरों में ही देख पाएंगी। वह बताती हैं कि स्पेन में लोग अपना कचरा अपने साथ लेकर चलते हैं, जबकि यहां यह आदत अभी विकसित नहीं हो पाई है।

जेमा और मनोज ने मिलकर “The 108 Peak Clean – Mountain Safe Mountain” नाम से एक समूह बनाया है, जिसके माध्यम से वे पर्वतारोहण के साथ-साथ सफाई अभियान और जागरूकता कार्यक्रम भी चला रहे हैं। वे स्कूलों, गांवों और ट्रैकिंग रूट्स पर जाकर बच्चों और स्थानीय लोगों को ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरण संरक्षण का महत्व समझा रहे हैं।

अब तक वे औली, वेदनी बुग्याल, चंद्रशिला, धर्मावली, लार्ड कर्जन ट्रैक सहित कई क्षेत्रों में सफाई कर चुके हैं। इसके साथ ही उन्होंने त्रिशूल (7120 मीटर) और मुकुट पर्वत (7242 मीटर) जैसी ऊंची चोटियों को भी सफलतापूर्वक पार किया है।