28 दिसंबर को ऋषिकेश में वन भूमि प्रकरण को लेकर हुए विरोध प्रदर्शन के बाद दर्ज किए गए मुकदमों और कथित निर्दोष नागरिकों की गिरफ्तारी के विरोध में स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने तहसील प्रशासन के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के पश्चात वन विभाग एवं पुलिस प्रशासन द्वारा जिस प्रकार अचानक कठोर कार्रवाई की गई, उससे वर्षों से निवास कर रहे लोगों में भय, मानसिक तनाव और आक्रोश की स्थिति उत्पन्न हो गई। जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों में तथ्यों की जांच हेतु समिति गठित करने का स्पष्ट उल्लेख था, लेकिन प्रशासन ने संवाद एवं संयम के बजाय बल प्रयोग को प्राथमिकता दी।
विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई लाठीचार्ज और पथराव की घटनाओं के बाद बिना निष्पक्ष जांच के ज्ञात-अज्ञात व्यक्तियों के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कर दिए गए, जिससे कई निर्दोष लोगों को जेल भेज दिया गया।
जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि 28 दिसंबर की घटना की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, निर्दोष लोगों के विरुद्ध दर्ज सभी फर्जी मुकदमे तत्काल वापस लिए जाएं तथा जेल में बंद व्यक्तियों की अविलंब रिहाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में इस प्रकार की दमनात्मक कार्रवाई न हो, इसके लिए प्रशासन को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
इस अवसर पर जिला पंचायत सदस्य विनीता रतूड़ी, ग्राम प्रधान शांति थपलियाल, आशुतोष शर्मा, दिनेश चंद्र मास्टर, विनोद चौहान, देवेंद्र दत्त बैलवाल सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे।



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