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post authorAdmin 04 Jan 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड: एसआईटी का स्पष्ट बयान—जांच में अब तक किसी वीआईपी की संलिप्तता नहीं, एसपी शेखर सुयाल ने रखे तथ्य.

अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर गठित विशेष जांच टीम (SIT) ने एक बार फिर स्थिति स्पष्ट की है। एसआईटी के सदस्य एवं तत्कालीन एसपी देहात हरिद्वार शेखर सुयाल ने शनिवार को पत्रकार वार्ता के दौरान जांच से जुड़े अहम तथ्य साझा किए।

शेखर सुयाल ने बताया कि एसआईटी की जांच में अब तक किसी भी वीआईपी व्यक्ति की संलिप्तता के प्रमाण सामने नहीं आए हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि जांच के दौरान एक कथित वीआईपी की पहचान जरूर हुई थी, लेकिन उसके खिलाफ कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सके।

उन्होंने कहा कि घटना के बाद यह चर्चा सामने आई थी कि रिजॉर्ट में किसी वीआईपी के आने की संभावना थी और उसे विशेष सेवाएं देने के लिए अंकिता पर दबाव बनाया जा रहा था। अंकिता द्वारा इनकार किए जाने के बाद उसकी हत्या कर दी गई—ऐसा प्रारंभिक तौर पर कहा गया। उस समय यह एक “ब्लाइंड केस” था, जिसकी शुरुआत गुमशुदगी से हुई थी। हालांकि, एसआईटी ने जांच शुरू करते ही शुरुआती पांच घंटों में ही तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।

एसपी सुयाल ने बताया कि अंकिता और उसके मित्र के बीच हुई चैट में वीआईपी का जिक्र सामने आया था, जिस पर गंभीरता से जांच की गई। अंकिता के मित्र पुष्प के बयान दर्ज किए गए। रिजॉर्ट स्टाफ, दोस्तों और उपलब्ध दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर एक स्केच तैयार कराया गया, जिसकी पहचान नोएडा निवासी धर्मेंद्र उर्फ प्रधान के रूप में हुई।

एसआईटी ने धर्मेंद्र को भी जांच में शामिल किया और उसकी रिजॉर्ट में मौजूदगी, आने-जाने के कारणों तथा अन्य पहलुओं की विस्तार से जांच की। जांच में यह सामने आया कि वह जमीन खरीद के सिलसिले में क्षेत्र में आया था और स्थानीय परिचित उसे भोजन के लिए रिजॉर्ट ले गया था। उसके खिलाफ भी किसी प्रकार का आपराधिक साक्ष्य नहीं मिला।

एसपी सुयाल ने यह भी स्पष्ट किया कि सजा काट रहे तीनों दोषियों ने अंकिता पर “एक्स्ट्रा सर्विस” देने का दबाव बनाने की बात स्वीकार की है, लेकिन किसी वीआईपी की मौजूदगी या भूमिका की पुष्टि नहीं हो सकी।