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post authorAdmin 19 Dec 2025

आईआईटी रुड़की में अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन का शुभारंभ, 150 शोध पत्र होंगे प्रस्तुत.

रुड़की (उत्तराखंड): आईआईटी रुड़की में शिक्षा में रामायण के महत्व को रेखांकित करने के उद्देश्य से गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय रामायण सम्मेलन का शुभारंभ हुआ। यह तीन दिवसीय सम्मेलन आईआईटी रुड़की और श्री रामचरित भवन, अमेरिका के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन में भारत और विदेशों से आए विद्वान, संत, शोधकर्ता और शिक्षाविद भाग ले रहे हैं। इस दौरान भारतीय ज्ञान परंपरा पर व्यापक विमर्श किया जा रहा है और रामायण व संबंधित आध्यात्मिक साहित्य पर आधारित लगभग 150 शोध पत्र प्रस्तुत किए जाएंगे।

सम्मेलन को संबोधित करते हुए आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. के.के. पंत ने कहा कि संस्थान का राष्ट्रगान भी गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस की पंक्ति से प्रेरित है। उन्होंने बताया कि “परहित सरिस धर्म नहीं भाई” और “सर्जन हित जीवन नित अर्पित” जैसे विचार सामाजिक सेवा और मानव कल्याण की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

वक्ताओं ने रामायण के मूल्यों—कर्तव्य, नैतिकता, सामाजिक उत्तरदायित्व और राम राज्य की अवधारणा—को सतत विकास, स्वास्थ्य, नैतिक शिक्षा और राष्ट्र निर्माण जैसे समकालीन विषयों से जोड़ा।


युवाओं को मिला जीवन मूल्यों का संदेश

प्रो. पंत ने युवाओं से आह्वान किया कि वे शिक्षा को केवल आजीविका का साधन न मानें, बल्कि समाज सेवा और विकसित भारत 2047 के निर्माण का माध्यम बनाएं।

महामंडलेश्वर स्वामी हरि चेतानंद ने आधुनिक जीवनशैली में चरित्र निर्माण और आंतरिक शांति के लिए रामायण, महाभारत और अन्य धर्मग्रंथों के महत्व पर प्रकाश डाला।


सम्मान और विमोचन

उद्घाटन सत्र में “गीता शब्द अनुक्रमणिका” का विमोचन किया गया।
संस्कृत के वरिष्ठ विद्वान प्रो. महावीर अग्रवाल को भारतीय ज्ञान परंपरा में उनके योगदान के लिए मरणोपरांत “रामायण रत्न” पुरस्कार से सम्मानित किया गया।