अमृतसर। द्रौपदी मुर्मु ने गुरुवार को पंजाब के अमृतसर स्थित गुरु नानक देव विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छात्रों को संबोधित किया। राष्ट्रपति ने कहा कि औपचारिक शिक्षा पूरी करने के बाद छात्र अलग-अलग दिशाओं में अपने जीवन की नई यात्रा शुरू करते हैं, लेकिन जीवन में सफलता के मूल मूल्य हर क्षेत्र में समान होते हैं।
उन्होंने कहा कि कुछ विद्यार्थी सरकारी या निजी सेवाओं में जाएंगे, कुछ उच्च शिक्षा और अनुसंधान को चुनेंगे, जबकि कई युवा उद्यमिता या शिक्षण के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाएंगे। इन सभी क्षेत्रों में निरंतर सीखने की इच्छा, ईमानदारी, नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता, असफलताओं से सीखने का साहस, टीम वर्क और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग अत्यंत आवश्यक है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने जोर देकर कहा कि शिक्षा केवल आजीविका का साधन नहीं है, बल्कि समाज और राष्ट्र की सेवा का प्रभावी माध्यम भी है। उन्होंने छात्रों को स्मरण कराया कि समाज ने उन्हें शिक्षा दी है, इसलिए समाज के प्रति उनका कर्तव्य बनता है कि वे वंचित और पिछड़े वर्गों के उत्थान में योगदान दें।
उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने तकनीकी विकास और उद्यमशीलता के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में युवाओं के लिए असीम अवसर मौजूद हैं। उच्च शिक्षा संस्थान अनुसंधान, उद्योग-अकादमिक सहयोग और सामाजिक नवाचार को बढ़ावा देकर इस प्रगति को और गति दे सकते हैं।
राष्ट्रपति ने पंजाब में बढ़ती नशे की समस्या पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यह चुनौती युवाओं के स्वास्थ्य के साथ-साथ सामाजिक और नैतिक ताने-बाने को भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों को युवाओं को सही दिशा देने में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।
उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत’ के निर्माण के लिए आने वाले दो दशक अत्यंत निर्णायक हैं और भारत का भविष्य वैज्ञानिक सोच, जिम्मेदारी और सेवा-भाव से कार्य करने वाले युवाओं पर निर्भर करता है।



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