देहरादून की अदालत ने कुकर्म के दोषी एक स्कूल हॉस्टल वार्डन की सजा को लेकर बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने दोषी की दो साल की सजा को बढ़ाकर सात साल कर दिया है, साथ ही जुर्माने की राशि भी बढ़ाकर 15 हजार रुपये कर दी गई है।
दरअसल, दोषी वार्डन ने अपनी सजा माफ कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन यह याचिका उसके लिए उल्टी साबित हुई। अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि नाबालिग छात्र के साथ किया गया यह अपराध अत्यंत गंभीर है और इसके लिए दो साल की सजा बिल्कुल भी पर्याप्त नहीं मानी जा सकती।
कोर्ट ने पीड़ित पक्ष की अपील को स्वीकार करते हुए कहा कि घटना के समय पीड़ित छात्र की उम्र महज 13 वर्ष थी। दोषी हॉस्टल वार्डन था और बच्चों की सुरक्षा उसकी जिम्मेदारी थी, लेकिन उसने अपने पद का दुरुपयोग कर छात्र को मानसिक और शारीरिक रूप से गंभीर आघात पहुंचाया।
अदालत ने दोषी की उस याचिका को भी खारिज कर दिया, जिसमें उसने खुद को निर्दोष बताते हुए सजा माफ करने की मांग की थी। कोर्ट ने दोषी को 29 जनवरी तक अदालत में पेश होने के आदेश दिए हैं।
पीड़ित पक्ष के वकील के अनुसार, यह घटना नवंबर 2011 की है। उस समय पीड़ित छात्र देहरादून के खुड़बुड़ा इलाके स्थित एक स्कूल के हॉस्टल में रहकर सातवीं कक्षा में पढ़ाई कर रहा था। आरोपी वार्डन शक्ति सिंह सरधना, मेरठ का निवासी है।
वार्डन की हरकतों से डरकर छात्र हॉस्टल से भाग गया और अपने पिता के एक परिचित के पास पहुंचकर पूरी आपबीती बताई, जिसके बाद पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई। कोर्ट के इस फैसले से पीड़ित पक्ष ने संतोष जताया है और कहा है कि ऐसे मामलों में सख्त सजा समाज के लिए जरूरी संदेश है।



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