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post authorAdmin 20 Jan 2026

UP–हरियाणा में खर्च हो रही उत्तराखंड की सांसद निधि, RTI खुलासे से गरमाया सियासी सवाल.

सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत सामने आए दस्तावेजों ने उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। RTI से मिली जानकारी के अनुसार, उत्तराखंड के सांसदों की विकास निधि का एक हिस्सा उत्तर प्रदेश और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों में खर्च किया गया है, जबकि खुद उत्तराखंड आज भी सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी से जूझ रहा है।

RTI दस्तावेजों के मुताबिक, सांसद निधि से उत्तर प्रदेश और हरियाणा में ट्यूबवेल, स्कूल, सामुदायिक भवन और जल निकासी जैसे कार्यों के लिए कुल 1 करोड़ 28 लाख रुपये आवंटित किए गए। इस सूची में टिहरी गढ़वाल से सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2024–25 में उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में फुटपाथ, पैदल मार्ग और पेयजल से जुड़े कार्यों के लिए 1 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की।

वहीं राज्यसभा सांसद नरेश बंसल ने हरियाणा में स्कूल, कॉलेज और सामुदायिक भवनों के लिए 25 लाख रुपये की निधि आवंटित की। नए नियमों के तहत अब सांसद एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 50 लाख रुपये तक की राशि देश के किसी भी राज्य में खर्च कर सकते हैं।

RTI में यह भी सामने आया कि पूर्व राज्यसभा सांसद तरुण विजय के कार्यकाल (2010–2016) के दौरान स्वीकृत धनराशि को दिसंबर 2025 में जारी किया गया। इस राशि से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में जल निकासी और सड़क निर्माण जैसे कार्य कराए गए।

मामले के सामने आने के बाद जनता के बीच सवाल उठने लगे हैं। टिहरी सांसद माला राज्य लक्ष्मी शाह का कहना है कि उत्तराखंड के लोग देशभर में रहते हैं और जरूरतमंद लोगों की मांग पर कुछ कार्यों को मंजूरी दी गई। उनका दावा है कि सांसद निधि का अधिकांश हिस्सा उत्तराखंड में ही खर्च होता है।

इधर, अल्मोड़ा से सांसद अजय टम्टा ने अपने संसदीय क्षेत्र से बाहर नैनीताल जिले में स्कूल और कॉलेज भवन निर्माण के लिए 5 लाख रुपये स्वीकृत किए थे। यह संभव हो पाया क्योंकि केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय ने 13 अगस्त 2024 को सांसद निधि नियमों में संशोधन किया।