उत्तराखंड के हल्द्वानी से इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। अल्मोड़ा जिले के गोलना करड़िया निवासी टैक्सी चालक नंदन बिरौड़िया की पत्नी सीमा की मौत के बाद एक निजी अस्पताल ने कथित तौर पर शव को बंधक बना लिया।
परिजनों का आरोप है कि महिला को अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज से हायर सेंटर रेफर किए जाने के बाद हल्द्वानी के निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। भर्ती के समय ही अस्पताल प्रबंधन ने 50 हजार रुपये जमा कराए और इसके बाद 7 हजार रुपये और लिए गए।
अस्पताल में भर्ती होने के महज डेढ़ से दो घंटे के भीतर ही 40 वर्षीय सीमा की मौत हो गई। इसके बावजूद इलाज जारी रहने का दिखावा किया गया और मृतका के परिजनों को 90 हजार रुपये का भारी-भरकम बिल थमा दिया गया। आर्थिक तंगी के कारण परिजन केवल 57 हजार रुपये ही जमा कर पाए।
बकाया करीब 30 हजार रुपये न चुका पाने पर अस्पताल प्रबंधन ने शव सौंपने से इनकार कर दिया। इसको लेकर अस्पताल परिसर में हंगामा भी हुआ। मामला सामने आने के बाद पीड़ित पति की तहरीर पर पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ बीएनएस की धारा 308(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया है।
अस्पताल प्रबंधन ने आरोपों को खारिज किया है, लेकिन इस घटना ने एक बार फिर निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।



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