उत्तराखंड में रिवर्स पलायन अब सिर्फ आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह गांवों में नई आर्थिक उम्मीद बनकर उभर रहा है। बीते पांच वर्षों में प्रदेश के 13 जिलों में 6,282 प्रवासी अपने पैतृक गांव लौटे हैं, जिनमें 169 प्रवासी विदेशों से वापस आए हैं।
उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट-2025 के अनुसार, विदेशों से लौटे प्रवासी चीन, दुबई, ओमान, भूटान, जांबिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, मॉरीशस, अमेरिका (कैलिफोर्निया), फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, कतर, नेपाल, कुवैत, कीनिया, मालदीव, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, थाईलैंड, पोलैंड, रूस, तंजानिया, नाइजीरिया और अबूधाबी जैसे देशों में कार्यरत थे।
रोजगार व कारोबार का अनुभव लेकर लौटे इन प्रवासियों ने सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाते हुए गांवों में आर्थिक गतिविधियों की नई शुरुआत की। रिपोर्ट के अनुसार, 39 प्रतिशत प्रवासियों ने कृषि व बागवानी, 21 प्रतिशत ने पर्यटन और होम-स्टे, 18 प्रतिशत ने पशुपालन, जबकि 6 प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग में काम शुरू किया।
सबसे अधिक रिवर्स पलायन टिहरी जिले में दर्ज किया गया है। प्रवासियों की यह पहल अब गांवों में अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन रही है।



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