भारत ने बाल विवाह जैसी सामाजिक कुप्रथा को जड़ से समाप्त करने के लिए अपने कानूनी, सामाजिक और प्रशासनिक प्रयासों को और तेज कर दिया है। सरकार ने स्पष्ट लक्ष्य तय किया है कि वर्ष 2030 तक भारत को बाल विवाह मुक्त राष्ट्र बनाया जाए।
राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (2019-21) के अनुसार, देश में 20-24 वर्ष की आयु की लगभग 23 प्रतिशत महिलाओं का विवाह 18 वर्ष से पहले हो चुका है। यह आंकड़ा इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है और यह भी बताता है कि केवल कानून नहीं, बल्कि व्यापक सामाजिक परिवर्तन की आवश्यकता है।
बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत बाल विवाह को स्पष्ट रूप से अपराध घोषित किया गया है। इसके साथ-साथ भारतीय न्याय संहिता, 2023 और पोक्सो अधिनियम, 2012 के प्रावधानों ने इस अपराध को और गंभीर बना दिया है।
सरकार का मानना है कि जागरूकता, सख्त प्रवर्तन और समुदाय की भागीदारी से ही इस सामाजिक बुराई को समाप्त किया जा सकता है। इसी सोच के तहत महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने 27 नवंबर 2024 को बाल विवाह मुक्त भारत राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत की, जो 2030 तक इस कुप्रथा को पूरी तरह खत्म करने का संकल्प है।



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