देहरादून में विदेशी घुसपैठियों को फर्जी भारतीय पहचान दिलाने वाले संगठित सिंडिकेट का एक और मामला सामने आया है। पटेलनगर क्षेत्र से गिरफ्तार बांग्लादेशी नागरिक सुबेदा बेगम उर्फ प्रिया के फर्जी दस्तावेजों ने पुलिस जांच की दिशा स्पष्ट कर दी है।
जांच में खुलासा हुआ है कि सुबेदा के जन्म प्रमाणपत्र, आधार कार्ड, पैन कार्ड और वोटर आईडी दो कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) — एक Dehradun और दूसरा Roorkee — के माध्यम से तैयार कराए गए। इन दस्तावेजों के आधार पर वह लंबे समय से भारत में रह रही थी।
पटेलनगर पुलिस ने देहरादून स्थित CSC सेंटर संचालक फिरोज से घंटों पूछताछ की है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि दस्तावेजों के लिए ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से आवेदन किया गया था और सत्यापन स्थानीय बीएलओ (Booth Level Officer) द्वारा किया गया। अब पुलिस यह जांच कर रही है कि उस दौरान किन बीएलओ की ड्यूटी थी।
यह मामला पहले सामने आए मामून हसन और बबली बेगम केस से मेल खाता है। मामून हसन बांग्लादेशी नागरिक होते हुए भी सचिन चौहान बनकर नेहरू कॉलोनी में रह रहा था, जबकि बबली बेगम भूमि शर्मा बनकर देहरादून में निवास कर रही थी। दोनों मामलों में भी CSC सेंटरों की भूमिका सामने आई थी।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सुबेदा ने अपने बयान में माना है कि उसका वोटर कार्ड स्थानीय बीएलओ की संस्तुति से बना था। इससे सरकारी तंत्र के भीतर मिलीभगत की आशंका और गहरी हो गई है।
एसएसपी अजय सिंह ने बताया कि सुबेदा के पास से बांग्लादेशी भाषा में पहचान पत्र, कई नामों से बने फर्जी दस्तावेज और बैंक खातों का विवरण बरामद किया गया है। पुलिस की एक विशेष टीम रुड़की में CSC संचालक अजीत कुमार की तलाश में जुटी है।
अब तक देहरादून में 20 बांग्लादेशी नागरिक पुलिस के रडार पर आ चुके हैं। इनमें से 10 को डिपोर्ट किया जा चुका है, जबकि 10 आरोपियों को जेल भेजा गया है। जांच लगातार जारी है।



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