देहरादून।
साल के पहले प्रमुख पर्व मकर संक्रांति को लेकर इस बार तिथि और धार्मिक परंपराओं के कारण असमंजस की स्थिति बन गई है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति के दिन ही षटतिला एकादशी पड़ने से पारंपरिक खिचड़ी बनाने पर संशय बना हुआ है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का प्रयोग वर्जित माना जाता है। ऐसे में मकर संक्रांति पर बनने वाली पारंपरिक खिचड़ी इस बार नहीं बनाई जा सकेगी। इसे लेकर लोगों के बीच अलग-अलग मत सामने आ रहे हैं। कुछ लोग अगले दिन खिचड़ी बनाने की बात कर रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि इस बार खिचड़ी के बिना ही पर्व मनाया जाएगा।
श्री बुद्धिबल्लभ पंचांग के संपादक आचार्य पवन पाठक के अनुसार,
14 जनवरी को सूर्यदेव दोपहर 3 बजकर 7 मिनट पर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। वहीं षटतिला एकादशी सुबह 3:18 बजे से शुरू होकर शाम 5:53 बजे तक रहेगी। एकादशी के कारण चावल से बनी सामग्री का सेवन वर्जित रहेगा, इसलिए खिचड़ी नहीं बनाई जा सकेगी। श्रद्धालु चाहें तो अगले दिन खिचड़ी बना सकते हैं।
आचार्य पवन पाठक ने बताया कि ऐसा संयोग 19 वर्षों बाद बना है जब मकर संक्रांति और षटतिला एकादशी एक ही दिन पड़ रही है। उन्होंने कहा कि मकर संक्रांति पर स्नान, तिल, घी और कंबल का दान विशेष पुण्य फल प्रदान करता है। एकादशी के दिन भगवान को श्वेत तिल अर्पित किए जा सकते हैं और साबूदाने की खिचड़ी या तिल से बनी सामग्री का सेवन किया जा सकता है।
वहीं इस बार मकर संक्रांति से शुभ और मांगलिक कार्यों की शुरुआत भी नहीं हो सकेगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. सुशांत राज के अनुसार, शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण मकर संक्रांति से विवाह सहित अन्य शुभ कार्य प्रारंभ नहीं होंगे। शुक्र ग्रह के उदय के बाद 2 फरवरी से मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो सकेंगे।



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