देहरादून : ParajSparsh News
उत्तराखंड सरकार ने समान नागरिक संहिता (UCC) संशोधन अध्यादेश जारी करते हुए लिव-इन रिलेशनशिप और विवाह से जुड़े मामलों में कड़े दंड प्रावधान लागू कर दिए हैं। अब यदि कोई व्यक्ति दबाव, धोखाधड़ी या पहचान छिपाकर किसी के साथ शादी करता है या लिव-इन में रहता है, तो ऐसे मामलों में 7 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान किया गया है।
सरकार के मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति पहले से विवाहित होने के बावजूद बिना वैधानिक विवाह-विच्छेद के दूसरी शादी करता है या लिव-इन में रहता है, तो यह भी दंडनीय अपराध होगा।
वहीं, नाबालिग से विवाह या गलत जानकारी देकर नाबालिग के साथ लिव-इन में रहने पर 6 महीने की सज़ा और 50 हज़ार रुपये जुर्माना लगाया जा सकता है।
संशोधित अध्यादेश में IPC की जगह अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं लागू की गई हैं। गंभीर मामलों में POCSO सहित अन्य क़ानूनों के तहत अलग से मुकदमा भी चलेगा।
इसके अलावा, पहचान छिपाकर विवाह, ग़लत जानकारी देना, या ग़ैरक़ानूनी तरीके से विवाह-विच्छेद करना भी अपराध की श्रेणी में रखा गया है—जिस पर 3 साल तक की कैद और जुर्माने का प्रावधान है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों के बीच विवाह या लिव-इन का UCC के तहत पंजीकरण नहीं होगा।



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