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post authorAdmin 30 Jan 2026

उत्तराखण्ड में पारदर्शी खनन नीति का असर: ₹300 करोड़ से ₹1200 करोड़ तक पहुंचा वार्षिक राजस्व.

खनन गतिविधियों को लेकर आमतौर पर लोगों के मन में पर्यावरणीय क्षति और अवैध गतिविधियों की नकारात्मक छवि बनी रहती है, लेकिन उत्तराखण्ड में इस धारणा को बदलने की दिशा में प्रदेश सरकार ने ठोस कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार ने खनन आवंटन, खनन परिवहन और निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह पारदर्शी और तकनीक-आधारित बनाया है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2024 में लागू की गई नई खनन नीति के बाद राज्य का वार्षिक खनन राजस्व ₹300 करोड़ से बढ़कर ₹1200 करोड़ के पार पहुंच गया है। मुख्यमंत्री का कहना है कि प्रदेश में आवासीय निर्माण, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और विकास कार्यों के लिए खनन सामग्री की आवश्यकता होती है, इसलिए यह सुनिश्चित किया गया कि खनन कार्य पर्यावरणीय मानकों के अनुरूप हो।

नई नीति के तहत ई-नीलामी के माध्यम से खनन लॉट आवंटन, खनन गतिविधियों की सैटेलाइट निगरानी, माइनिंग सर्विलांस सिस्टम और डिजिटल ट्रैकिंग जैसी व्यवस्थाएं लागू की गईं। इसके साथ ही अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिससे राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।

खनन सुधारों के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते उत्तराखण्ड को देश में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ है। इसके परिणामस्वरूप केंद्र सरकार ने वित्तीय वर्ष 2025–26 के लिए “पूंजी निवेश हेतु राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI)” के अंतर्गत उत्तराखण्ड को ₹200 करोड़ की विशेष सहायता स्वीकृत की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मॉडल अन्य राज्यों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।