उत्तराखंड के कोटद्वार से सामने आया एक मामला इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। जिम संचालक दीपक कुमार, जिन्होंने एक मुस्लिम दुकानदार के पक्ष में खड़े होकर खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया, सोशल मीडिया पर इंसानियत की मिसाल के तौर पर वायरल हो गए। लेकिन इसी घटना के बाद उनके खिलाफ भी एफआईआर दर्ज कर दी गई है।
पूरा मामला 28 जनवरी का है, जब कोटद्वार के पटेल मार्ग पर स्थित एक मुस्लिम दुकानदार शोएब की दुकान “बाबा ड्रेस” के नाम को लेकर कुछ हिंदू संगठनों ने आपत्ति जताई। संगठन के लोग दुकान का नाम बदलने की मांग कर रहे थे। इसी दौरान जिम मालिक दीपक कुमार वहां पहुंचे और दुकानदार के समर्थन में सामने आ गए।
बहस के दौरान जब दीपक से उनका नाम पूछा गया, तो उन्होंने खुद को “मोहम्मद दीपक” बताया। इसके बाद उन्होंने कहा कि वे न तो हिंदू हैं, न मुसलमान, न सिख और न ईसाई—सबसे पहले वे एक इंसान हैं। दीपक ने सवाल उठाया कि क्या 30 साल पुरानी दुकान का नाम बदलवाना सही है।
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही देशभर में दीपक की तारीफ होने लगी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी दीपक की इंसानियत की सराहना की। हालांकि, वायरल वीडियो के बाद हालात बदल गए।
31 जनवरी को बजरंग दल और गौ रक्षा दल के कार्यकर्ता दोबारा दुकान के बाहर पहुंचे। नारेबाजी हुई और दीपक कुमार की गिरफ्तारी की मांग की गई। पुलिस के मुताबिक, विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी।
इसके बाद कोटद्वार पुलिस ने तीन अलग-अलग एफआईआर दर्ज कीं।
पहली एफआईआर 30-40 अज्ञात प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज की गई।
दूसरी एफआईआर स्थानीय वकील अहमद की शिकायत पर, जिसमें प्रदर्शनकारियों पर गाली-गलौज और जातिवादी भाषा के इस्तेमाल का आरोप है।
तीसरी एफआईआर कमल प्रसाद की शिकायत पर दर्ज की गई, जिसमें दीपक कुमार और उनके साथियों पर अपमानजनक भाषा और धमकी देने का आरोप लगाया गया है।
फिलहाल मामला जांच में है। एक ओर इंसानियत की मिसाल बने दीपक, दूसरी ओर कानून के दायरे में दर्ज एफआईआर—यही इस पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा सवाल है।



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