भारत रक्षा और अर्थव्यवस्था—दोनों मोर्चों पर एक साथ बड़ी छलांग लगाने की ओर बढ़ रहा है।
हाइपरसोनिक तकनीक पर आधारित ‘सुपर ब्रह्मोस’ और भारत-अमेरिका ट्रेड डील को विशेषज्ञ देश के भविष्य के लिए गेम-चेंजर मान रहे हैं।
ब्रह्मोस एयरोस्पेस के पूर्व प्रमुख और वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. ए. शिवथनु पिल्लै ने कहा कि भारत अब पारंपरिक मिसाइल तकनीक से आगे बढ़कर हाइपरसोनिक युग में प्रवेश कर चुका है।
उन्होंने बताया कि मौजूदा ब्रह्मोस की गति मैक-3 है, लेकिन लक्ष्य इसे मैक-7 तक ले जाना है, जिससे यह दुनिया की सबसे तेज और अजेय मिसाइलों में शामिल हो जाएगी।
डॉ. पिल्लै के अनुसार, भारत पहले ही 1000 सेकंड तक हाइपरसोनिक तकनीक का सफल परीक्षण कर चुका है, जो केवल गिने-चुने देशों के पास उपलब्ध है।
फिलीपींस को ब्रह्मोस निर्यात के बाद कई देशों ने इसमें रुचि दिखाई है, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सेना को मिलने वाला संस्करण निर्यात संस्करण से अधिक उन्नत होता है।
उन्होंने सरकार द्वारा रक्षा अनुसंधान पर बढ़ाए गए खर्च और एएमसीए जैसे स्वदेशी फाइटर जेट प्रोजेक्ट की भी सराहना की।
अर्थव्यवस्था के मोर्चे पर, भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को ऐतिहासिक बताया।
उन्होंने कहा कि यह समझौता सिर्फ टैरिफ कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे निवेश, तकनीक और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि आज भारत की नीतियां वैश्विक निवेशकों के लिए भरोसे का प्रतीक बन चुकी हैं।
विदेश मामलों के विशेषज्ञ डॉ. शैलेंद्र के. देओलंकर ने कहा कि अप्रैल 2025 में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ को अब वापस लेना भारत की कूटनीतिक जीत है।
उन्होंने बताया कि इस डील से ऑटो पार्ट्स, रत्न-आभूषण, वस्त्र, चमड़ा, कृषि, मत्स्य और डेयरी जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ होगा।
राजकोट चैंबर ऑफ कॉमर्स के सचिव पार्थ गणात्रा ने कहा कि टैरिफ घटने से गुजरात, सौराष्ट्र समेत पूरे राज्य के उद्योगों को नई संजीवनी मिलेगी और निर्यात फिर से रफ्तार पकड़ेगा।



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