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post authorAdmin 04 Feb 2026

बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार के खिलाफ अमेरिका के 25 शहरों में मानवाधिकारों की गूंज.

अमेरिका में बांग्लादेश के हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों पर हो रही हिंसा के विरोध में व्यापक जन-आंदोलन देखने को मिला। पिछले कुछ दिनों में अमेरिका के 25 शहरों में शांतिपूर्ण जागरूकता रैलियां आयोजित की गईं। कड़ाके की ठंड, बर्फबारी और जमी सड़कों के बावजूद बड़ी संख्या में नागरिक सिटी हॉल और सिविक सेंटर्स पर एकत्र हुए और धार्मिक रूप से लक्षित हिंसा के पीड़ितों के साथ एकजुटता प्रकट की।

प्रदर्शनकारियों ने मौन रखकर प्रार्थनाएं कीं और कमजोर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए शांतिपूर्ण अपील जारी की। आयोजकों के अनुसार, ये रैलियां गैर-राजनीतिक और मानवीय उद्देश्य से प्रेरित थीं। मिडवेस्ट से लेकर पूर्वी और पश्चिमी तट तक प्रदर्शनकारियों ने लिंचिंग, आगजनी, यौन हिंसा और लक्षित हत्याओं की रिपोर्ट की गई घटनाओं के प्रति लोगों को जागरूक किया।

इस राष्ट्रव्यापी अभियान का समन्वय दैपायन देब, दीप्ति महाजन, गीता सिकंद और दिव्या जैन ने किया।
दैपायन देब ने कहा कि रैलियां शांतिपूर्ण, गरिमामय और मानवीय मूल्यों से प्रेरित थीं। दीप्ति महाजन ने स्पष्ट किया कि यह पहल राजनीति नहीं, बल्कि करुणा से प्रेरित है—जब निर्दोषों को निशाना बनाया जाता है, तो मानवीय गरिमा सर्वोपरि होनी चाहिए।

गीता सिकंद के अनुसार, रैलियों ने विभिन्न समुदायों और धर्मों के बीच एकता को उजागर किया। बांग्लादेशी हिंदू-अमेरिकियों ने भी भाग लेकर अपने समुदाय की सुरक्षा और अस्तित्व को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने बांग्लादेश सरकार की उदासीनता पर चिंता जताते हुए प्रभावी सुरक्षा उपायों की आवश्यकता बताई।
दिव्या जैन ने इसे “शांत शक्ति” का उदाहरण बताया—जागरूकता की शुरुआत सामने आकर खड़े होने से होती है। कई शहरों में स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों और नागरिक नेताओं की भागीदारी ने शांतिपूर्ण नागरिक अभिव्यक्ति की अहमियत को रेखांकित किया।