गीता प्रेस द्वारा प्रकाशित सुप्रसिद्ध आध्यात्मिक पत्रिका कल्याण के शताब्दी समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय संस्कृति और सनातन परंपरा को लेकर एक गहरा वैचारिक संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि “कल्याण ने केवल पन्ने नहीं छापे, बल्कि भारत की आत्मा को मुद्रित किया है।”
बुधवार को स्वर्गाश्रम स्थित गीता भवन में आयोजित इस शताब्दी महोत्सव में अमित शाह ने कहा कि जब-जब भारत की संस्कृति पर संकट आया, तब-तब कल्याण पत्रिका ने शास्त्र, तर्क और सत्य के माध्यम से सनातन परंपरा की लौ को जलाए रखा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सभ्यताएं शोर या तलवार से नहीं, बल्कि शब्द, ज्ञान और सत्व से निर्मित होती हैं।
अमित शाह ने कहा कि गीता प्रेस पिछले 103 वर्षों से मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि पीढ़ियों के निर्माण के उद्देश्य से कार्य कर रही है।
कल्याण पत्रिका केवल एक मासिक प्रकाशन नहीं, बल्कि भारतीय समाज के लिए आध्यात्मिक पथप्रदर्शक रही है।
उन्होंने महात्मा गांधी द्वारा दी गई उस सलाह को भी याद किया, जिसमें कहा गया था कि कल्याण में कभी विज्ञापन न छापा जाए। अमित शाह ने बताया कि शताब्दी अंक में भी एक भी विज्ञापन नहीं है, जो इस पत्रिका की तपस्वी परंपरा का प्रमाण है।
कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि कल्याण पत्रिका बीते सौ वर्षों से भारतीय जीवन मूल्यों, नैतिकता और सांस्कृतिक चेतना को प्रदीप्त कर रही है।
उन्होंने बताया कि गीता प्रेस ने 1923 से अब तक 101 करोड़ से अधिक धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन कर भारतीय ज्ञान परंपरा को विश्वभर में प्रतिष्ठित किया है।



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